पटना के गर्दनीबाग अस्पताल की पुरानी इमारत अब जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। छत से लगातार प्लास्टर और मलबा गिरने से मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में है। यहां तक कि दवा वितरण काउंटर की छत भी टूट चुकी है। इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए अस्पताल को 6 अगस्त तक नए भवन में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी, मगर यह काम तय समय में पूरा नहीं हो पाया।
नया भवन मूल रूप से दंत चिकित्सा और चर्म रोग विभाग के लिए निर्मित किया गया था। लेकिन वहां पहले से ही औषधि नियंत्रण विभाग का गोदाम और एक टीकाकरण केंद्र संचालित हो रहा है। दवाओं के बड़े स्टॉक की मौजूदगी के कारण शिफ्टिंग प्रक्रिया अटक गई है।
अस्पताल की उपाधीक्षक सीमा कुमारी के अनुसार, नए भवन के ग्राउंड फ्लोर पर आपातकालीन कक्ष और डीएच रूम तैयार हैं, लेकिन बाहरी प्रवेश-निकास के कार्य अधूरे हैं। साथ ही वार्ड, फर्श और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी वहां काम शुरू करना संभव नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप मरीज और स्टाफ अभी भी पुराने, खतरनाक भवन में ही अपनी सेवाएं और उपचार जारी रखने को मजबूर हैं।
