आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म केवल पढ़ाई, व्यापार और रोजगार तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अवैध गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल हो रहे हैं। महादेव सट्टा एप इसका बड़ा उदाहरण है, जिसने देशभर में अपने नेटवर्क को फैला लिया है।
महादेव बुक सट्टा मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ-साथ आर्थिक अपराध शाखा (EOW), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी इसकी गहन जांच कर रही हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी जारी है। इसके बावजूद सिंडिकेट बेखौफ होकर सट्टा खिला रहा है।
रायपुर जैसे शहरों में केवल 500 रुपए में ऑनलाइन आईडी बनाई जा रही है। इस आईडी से व्यक्ति अलग-अलग गेम खेलकर दांव लगा सकता है। सोशल मीडिया पर लगातार विज्ञापन और प्रचार किए जा रहे हैं, जिससे 24 घंटे लोग इस जुए के जाल में फँसते जा रहे हैं। स्थानीय युवकों के पैनल बनाकर मोहल्लों और कॉलोनियों में इस धंधे को फैलाया जा रहा है।
मीडिया जांच में यह तथ्य सामने आया कि केवल कुछ सौ रुपए देकर कोई भी व्यक्ति सट्टा नेटवर्क से जुड़ सकता है। पूरी गतिविधि का मॉनिटरिंग दुबई से होती है और कोडवर्ड के जरिए इसका संचालन किया जाता है। इस वजह से भारतीय जांच एजेंसियों के लिए इसे पकड़ना कठिन हो जाता है।
यह अवैध धंधा न केवल समाज और युवाओं को गलत राह पर ले जा रहा है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। सरकार और कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती यह है कि कैसे इस पूरे नेटवर्क को तोड़कर दोषियों को सख्त सज़ा दी जाए।
