छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान सूरजपुर जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का गंभीर मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। यह विषय उस समय चर्चा में आया जब क्षेत्र के विधायक ने स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता बेहद आवश्यक है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे काफी अलग नजर आती है।
विधायक ने सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी कि अस्पताल में कुल कितने पद स्वीकृत हैं और वर्तमान में कितने डॉक्टर कार्यरत हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जो पद रिक्त हैं, उन्हें भरने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है। इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अस्पताल में कुल 16 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 14 पदों पर डॉक्टर कार्यरत हैं और 2 पद अभी खाली हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि विभाग इन रिक्त पदों को जल्द भरने की दिशा में कार्य कर रहा है।
हालांकि, विधायक ने मंत्री के जवाब पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि वास्तविक स्थिति कागजों से कहीं अधिक गंभीर है। उन्होंने बताया कि कई डॉक्टर उच्च शिक्षा (PG) के लिए गए हुए हैं और एक डॉक्टर निलंबित है, जिसके कारण अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या और भी कम हो गई है। इस वजह से मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
यह पूरा मामला प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी है कि वह न केवल रिक्त पदों को जल्द भरे, बल्कि यह भी सुनिश्चित करे कि अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता बनी रहे, ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।
