थराली: उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली में शुक्रवार देर रात बादल फटने से भारी तबाही मची है। इस प्राकृतिक आपदा में एक महिला की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है। करीब 80 घरों में 2 फीट तक मलबा और पानी भर गया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए। स्थानीय दुकानें और बाजार भी पूरी तरह तबाह हो गए हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए सेना, NDRF, SDRF और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं।
मामले का पूरा विवरण
घटना शुक्रवार देर रात करीब 1 बजे की है, जब थराली और आसपास के इलाकों में बादल फटने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन शुरू हो गया। चमोली जिला प्रशासन के अनुसार, भारी बारिश और मलबे के कारण थराली बाजार और आसपास के गांवों में भारी नुकसान हुआ। एक महिला अपने घर में मलबे में दब गई, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। एक अन्य व्यक्ति लापता है, और उसकी तलाश जारी है। मलबे और पानी ने 80 से ज्यादा घरों को अपनी चपेट में लिया, जिसमें कई मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
थराली के स्थानीय बाजार में दुकानों में भारी मात्रा में मलबा और पानी घुस गया, जिससे व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। सड़कें और रास्ते मलबे से जाम हो गए, जिसके कारण कई गांवों का संपर्क कट गया। इस आपदा ने स्थानीय लोगों के जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
राहत और बचाव कार्य
आपदा की सूचना मिलते ही चमोली जिला प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए। चमोली के डीएम संदीप तिवारी ने बताया कि सेना, NDRF, SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें रात से ही रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। सेना ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम शुरू किया है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है, और अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में बिजली, पानी और संचार सेवाओं को बहाल करने की कोशिश शुरू की है। हालांकि, भारी मलबे और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण राहत कार्यों में चुनौतियां आ रही हैं। BRO (बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन) को सड़कों को खोलने और यातायात बहाल करने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
डीएम संदीप तिवारी ने बताया कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान की जा रही है। मृतक के परिवार को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लापता व्यक्ति की तलाश के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं। उत्तराखंड सरकार ने केंद्र से भी अतिरिक्त सहायता मांगी है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम शुरू हो सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर दुख जताया और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “थराली में बादल फटने की घटना अत्यंत दुखद है। राहत और बचाव कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहे हैं। प्रभावित परिवारों के साथ हमारी सरकार खड़ी है।”
स्थानीय लोगों का आक्रोश और नुकसान
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर आपदा प्रबंधन में देरी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर समय पर चेतावनी दी गई होती, तो नुकसान को कम किया जा सकता था। कई परिवारों ने अपने घर, सामान और आजीविका खो दी है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में हुए नुकसान से उबरने में उन्हें लंबा समय लगेगा। इस आपदा ने थराली और आसपास के गांवों में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
उत्तराखंड में बार-बार बादल फटने की घटनाएं
उत्तराखंड में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं हाल के वर्षों में बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियोजित निर्माण और जंगलों की कटाई इसके प्रमुख कारण हैं। थराली में यह घटना इस साल की दूसरी बड़ी आपदा है। इससे पहले अगस्त में ही उत्तरकाशी के धराली और हरसिल में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ था।
आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने का निर्देश दिया है। सेना और NDRF की टीमें मलबे को हटाने और लापता व्यक्ति की तलाश में जुटी हैं। सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पानी, दवाइयां और अस्थायी आवास की व्यवस्था की है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिसके चलते प्रशासन को और सतर्क रहने को कहा गया है।
