बीजापुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर अपनी कायराना हरकतों से दहशत फैला दी है। बीते तीन दिनों में नक्सलियों ने तीन लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी, जिनमें दो शिक्षादूत (शिक्षा स्वयंसेवक) शामिल हैं। ताजा घटना में गंगालूर क्षेत्र के नेन्द्रा गांव में शिक्षादूत कल्लू ताती (25) को शुक्रवार की शाम स्कूल से लौटते वक्त नक्सलियों ने अगवा कर लिया और गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। शव को गांव के पास जंगल में फेंक दिया गया। इस साल अब तक नक्सलियों ने बीजापुर और सुकमा जिले में कुल 9 शिक्षादूतों को निशाना बनाकर मार डाला है।
हैरान करने वाली घटनाएं, ग्रामीणों में दहशत
पुलिस सूत्रों के अनुसार, नक्सलियों ने शिक्षादूतों पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर इन हत्याओं को अंजाम दिया। तीन दिन पहले बीजापुर-सुकमा सीमा पर सिलगेर गांव में शिक्षादूत लक्ष्मण बाडसे की भी नक्सलियों ने धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। इसके अलावा, एक अन्य ग्रामीण की हत्या भी जिले में हुई, जिससे स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षादूतों की हत्या के बाद बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं।
शिक्षा पर नक्सलियों की नजर बस्तर क्षेत्र में बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू करने की मुहिम में शिक्षादूत अहम भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन नक्सली इन प्रयासों को बाधित करने के लिए शिक्षकों को निशाना बना रहे हैं। बीजापुर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया, “नक्सली सुरक्षा बलों के एंटी-नक्सल ऑपरेशन से बौखलाए हुए हैं। शिक्षा के प्रसार से आदिवासी समुदाय मुख्यधारा से जुड़ रहा है, जो नक्सलियों को बर्दाश्त नहीं हो रहा।”
पुलिस ने तेज की कार्रवाई
हत्याओं के बाद पुलिस ने गंगालूर और आसपास के क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। बीजापुर और सुकमा में अब तक 9 शिक्षादूतों की हत्या हो चुकी है, जिनमें बीजापुर में 5 और सुकमा में 4 मामले शामिल हैं। इस साल जून 2023 से अब तक नक्सलियों ने कुल 6 शिक्षादूतों को मौत के घाट उतारा है।
सरकार और सुरक्षा बलों की रणनीति
छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्रीय सुरक्षा बल नक्सलवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहे हैं। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, “नक्सलियों का यह खूनी खेल अब और नहीं चलेगा। हमारी सरकार बस्तर के विकास और नक्सल प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है।” हाल के महीनों में सैकड़ों नक्सलियों को मार गिराया गया है, और कई ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है।
ग्रामीणों की मांग:
सुरक्षा और न्याय हत्याओं के बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। पिल्लूर गांव के एक ग्रामीण ने बताया, “हमारे बच्चे अब स्कूल जाने से डरते हैं। शिक्षादूतों की हत्या ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है।” स्थानीय लोग चाहते हैं कि सरकार और पुलिस नक्सलियों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई करे ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।
आगे क्या?
बीजापुर और सुकमा में नक्सलियों की हिंसा ने एक बार फिर शिक्षा और विकास के प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलियों की यह रणनीति ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत बनाए रखने और शिक्षा के प्रसार को रोकने की कोशिश है। सरकार ने 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इन घटनाओं ने चुनौतियों को और उजागर कर दिया है।
