September 3, 2026
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117 साल से बंद तिजोरी खुलेगी, सामने आ सकता है ‘दरिया-ए-नूर’: कोहिनूर की बहन मानी जाने वाली हीरे की गुत्थी सुलझाएगा बांग्लादेश

ढाका: बांग्लादेश सरकार ने 117 साल पुरानी उस तिजोरी को खोलने का फैसला लिया है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसमें दुनिया का सबसे कीमती हीरा ‘दरिया-ए-नूर’ छिपा है। यह वही हीरा है जिसे ‘कोहिनूर की बहन’ कहा जाता है। अंदेशा है कि 1908 में नवाब सलीमुल्लाह ने आर्थिक तंगी के चलते इसे बैंक में गिरवी रखा था। तब से यह तिजोरी बंद है और अब तक रहस्य बनी हुई है।

क्यों खास है यह हीरा?

  • दरिया-ए-नूर का मतलब है ‘रोशनी का दरिया’।
  • इसे गोलकुंडा की खदानों से निकाला गया था, जहां से कोहिनूर भी मिला था।
  • इसका वजन करीब 26 कैरेट बताया जाता है।
  • हीरे को कभी सोने की बाजूबंद में जड़ा गया था, जिसके चारों ओर 10 छोटे हीरे भी लगे थे।

इतिहास की झलक

यह हीरा कभी मराठा शासकों और हैदराबाद के मंत्री सिराज-उल-मुल्क के पास रहा। बाद में यह पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के पास पहुंचा। ब्रिटिश शासन आने के बाद इसे जब्त कर लिया गया। 1908 में ढाका के नवाब ने इसे बैंक में जमा किया, तभी से तिजोरी बंद है।

अब क्या होगा?

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 11 सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें कैबिनेट सचिव, वित्त मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं। तिजोरी खोलने की तारीख जल्द तय की जाएगी। सोनाली बैंक का कहना है—“vault की सील जस की तस है, कभी खोला ही नहीं गया।”

रहस्य अभी भी बरकरार

1985 में इसे देखने की कोशिश हुई थी, लेकिन किसी को अंदर जाने नहीं दिया गया। 2017 की रिपोर्ट्स में तो यहां तक कहा गया कि हीरा गायब हो चुका है। अब असली सच तभी सामने आएगा, जब 117 साल से बंद दरवाजा आखिरकार खुलेगा।

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