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June 5, 2026
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चीन का ‘जल जाल’: ब्रह्मपुत्र पर बना रहा दुनिया का सबसे बड़ा डैम, भारत के दरवाज़े पर मंडरा रहा जल संकट का साया

बीजिंग/नई दिल्ली. चीन ने भारत की पूर्वोत्तर सीमा के बेहद करीब ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग त्सांगपो) पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर डैम बनाना शुरू कर दिया है।

ये वही जगह है जहां से ब्रह्मपुत्र भारत में प्रवेश करती है—इसलिए इस डैम के निर्माण को लेकर भारत में चिंता और आशंका दोनों चरम पर हैं।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस डैम को ‘वाटर बम’ करार दिया है, जो आपदा की स्थिति में भारत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

कहां बन रहा है चीन का यह ‘वाटर बम’?

डैम का निर्माण तिब्बत के मेडोग काउंटी में हो रहा है, जो अरुणाचल प्रदेश की सीमा से बेहद सटा हुआ इलाका है यह स्थान ग्रेट बेंड कहा जाता है, जहां से ब्रह्मपुत्र नदी भारत में प्रवेश करती है। इस डैम की क्षमता 70 बिलियन यूनिट बिजली उत्पादन की बताई जा रही है—यह चीन के थ्री गॉर्ज डैम से भी बड़ा होगा।

भारत को क्यों सता रही चिंता?

1. पानी रोकने की ताकत: चीन डैम के ज़रिए ब्रह्मपुत्र का बहाव नियंत्रित कर सकता है, जिससे अरुणाचल और असम में बाढ़ या सूखे की स्थिति बन सकती है।

2. स्ट्रैटेजिक थ्रेट: भविष्य में युद्ध या तनाव की स्थिति में चीन इस डैम का पानी छोड़कर भारत में जल प्रलय ला सकता है।

3. पारदर्शिता की कमी: चीन ने न तो निर्माण से पहले भारत को सूचना दी, न कोई साझा अध्ययन किया।

क्या बोले अरुणाचल CM पेमा खांडू?

“यह सिर्फ एक डैम नहीं, एक वॉटर बम है। चीन किसी दिन इस पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है।” उन्होंने केंद्र सरकार से डिप्लोमैटिक दबाव बनाने और सैटेलाइट सर्वे के ज़रिए लगातार निगरानी की मांग की।

विशेषज्ञों की राय:

जल विशेषज्ञ मानते हैं कि

> “ब्रह्मपुत्र जैसी ट्रांस-बॉर्डर नदियों पर इस तरह का निर्माण हिमालय की पारिस्थितिकी और लाखों लोगों के जीवन पर सीधा असर डाल सकता है।”

यह डैम सिर्फ बिजली का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक पावर प्ले का हिस्सा है।

भारत सरकार का रुख:

भारत सरकार ने कहा है कि

“हम हालात पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय जल प्रोटोकॉल के तहत चीन के साथ आवश्यक बातचीत करेंगे।” साथ ही सरकार असम, अरुणाचल और पूर्वोत्तर राज्यों में जल स्टोरेज और अलर्ट सिस्टम को मजबूत कर रही है।

ब्रह्मपुत्र पर चीन का यह डैम, केवल एक बांध नहीं, एक रणनीतिक हथियार है भारत को अब जल-राजनय, सीमा सुरक्षा और जल विज्ञान—तीनों मोर्चों पर सजग रहना होगा। क्योंकि 21वीं सदी की जंग बंदूक से नहीं, पानी से लड़ी जा सकती है।

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