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October 20, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

100 रुपए रिश्वत के आरोप में 39 साल बाद बरी: रायपुर के बिल असिस्टेंट की लोकायुक्त द्वारा पकड़े जाने की घटना, हाईकोर्ट ने सजा की रद

रायपुर: रायपुर के एक बिल असिस्टेंट पर लोकायुक्त ने 100 रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। उस आरोप के तहत बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की सुनवाई हुई, और व्यक्ति को 1 वर्ष की जेल की सजा हुई थी। सजा काटने के कई वर्षों बाद, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अब इस बिल असिस्टेंट को बरी कर दिया है।

क्या था केस 

आरोप यह था कि सरकारी बिल पास करने के लिए वेतन आदि की प्रक्रिया में बिल असिस्टेंट ने 100 रुपए रिश्वत मांगी थी। लोकायुक्त प्रकरण स्थानिय प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत आया था, जहां भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच होती है। सजा वर्ष 2004 की थी, और उसके बाद लंबे अरसे तक न्यायिक प्रक्रिया चली।

हाईकोर्ट का आदेश और वजहें

हाईकोर्ट ने इस बरी का निर्णय सुनाते समय यह माना कि अभियोजन द्वारा पर्याप्त ‍प्रमाण नहीं प्रस्तुत किए गए थे। अदालत ने यह देखा कि कार्रवाई और प्रक्रिया में विधि-विधान एवं उपयुक्त न्यायिक सिद्धांतों का पालन सही तरह से नहीं हुआ।

महत्व और प्रतिक्रिया

इस फैसले से उन मामलों पर असर पड़ेगा जहाँ वर्षों बाद भी आरोपी दोषमुक्त हो सकते हैं, बशर्ते अभियोजन पक्ष के सबूत मजबूत न हों। जनमानस में यह आशा-जगाने वाला फैसला माना जा रहा है कि न्यायालय लंबी अवधि के बाद भी निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित कर सकता है।

कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि न्याय व्यवस्था में स्तर, प्रक्रिया में देरी, और साक्ष्यों के निपटान की स्थिति क्यों इतनी धीमी होती है।

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