छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए राजधानी रायपुर, बिलासपुर और धमतरी में कई कारोबारियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई राज्य में चल रहे कस्टम मिलिंग घोटाले और कोल लेवी घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है।
ईडी की टीम ने रायपुर स्थित रेहेजा ग्रुप, बिलासपुर के सुल्तानिया ग्रुप और मीनााक्षी सेल्स के कार्यालयों व आवासों पर दबिश दी। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इन घोटालों में शामिल लोगों ने अवैध कमाई से बड़ी मात्रा में रियल एस्टेट प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त की है। ईडी को कार्रवाई के दौरान कई वित्तीय दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति संबंधित कागजात मिले हैं।
ईडी के सूत्रों के मुताबिक, कस्टम मिलिंग घोटाले में धान की मिलिंग और भुगतान प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां की गईं। घोटाले के पैसों का इस्तेमाल अन्य कारोबारों में निवेश के लिए किया गया। वहीं कोल लेवी स्कैम में ईडी ने 10 से ज्यादा वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की है।
जांच में यह भी सामने आया कि 570 करोड़ रुपये की अवैध वसूली को वैध दिखाने के लिए ‘ऑफलाइन परमिट सिस्टम’ का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में कोल व्यापारियों से वसूली की गई रकम को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।
ईडी की जांच में कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को इस कोल लेवी घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है। आरोप है कि परिवहन पास और परमिट जारी करने के बदले में कोल व्यापारियों से वसूली गई रकम सूर्यकांत तिवारी के कर्मचारियों के खातों में जमा होती थी।
इस घोटाले में ईडी ने पूर्व आईएएस अधिकारी समीर बिश्नोई, रायगढ़ की कलेक्टर रानू साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सोनिया चौरसिया सहित कई अधिकारियों और कारोबारियों को आरोपी बनाया है।
ईडी की रिपोर्ट पर राज्य की EOW (Economic Offences Wing) ने भी जनवरी 2024 में एफआईआर दर्ज की थी और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, अब अधिकांश आरोपियों को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।
