भिलाई नगर की मतदाता सूची में बिलासपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी का नाम गलत तरीके से दर्ज किए जाने के मामले ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे एक ‘सुनियोजित ऑपरेशन’ बताते हुए भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह वही ‘स्क्रिप्ट’ है जो कुछ समय पहले बिहार में लागू की गई थी, जहाँ कथित रूप से मतदाता सूचियों से नाम हटाने और जोड़ने में अनियमितता सामने आई थी। अब वही तरीका छत्तीसगढ़ में अपनाया जा रहा है।
विजय केशरवानी का आरोप है कि वे कभी भिलाई नगर क्षेत्र के निवासी नहीं रहे, फिर भी रहस्यमय तरीके से उनका नाम इस मतदाता सूची में जोड़ दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि भिलाई के बीएलओ को उनका फॉर्म कैसे मिला, किसके आदेश पर उनका नाम सूची में दर्ज किया गया और यह प्रक्रिया बिना सिस्टम की आंतरिक मिलीभगत के सम्भव कैसे हुई। उन्होंने इसे किसी भी तरह की ‘लिपिकीय त्रुटि’ मानने से इनकार करते हुए इसे ‘पूर्वनियोजित साजिश’ करार दिया।
केशरवानी ने यह भी बताया कि उन्होंने एसआईआर फॉर्म बीएलओ को सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित सौंप दिया था, इसके बावजूद उनका नाम बिलासपुर की बजाय भिलाई में दर्ज कर दिया गया। उनका सीधा आरोप है कि भाजपा, चुनाव आयोग के साथ मिलकर कांग्रेस समर्थक मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है, ताकि चुनावी गणित को प्रभावित किया जा सके और विपक्ष को भ्रमित रखा जाए।
कांग्रेस नेताओं—शहर अध्यक्ष सिद्धांत मिश्र, ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और पूर्व शहर अध्यक्ष विजय पांडेय—ने कहा कि इस मामले को राज्यव्यापी मुद्दा बनाकर एक बड़े अभियान की शुरुआत की जाएगी। उनका दावा है कि मतदाता सूची में इस तरह की संभावित हेराफेरी लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने का प्रयास है। कांग्रेस ने सभी कार्यकर्ताओं से अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची की तुरंत जाँच करने की अपील भी की है, ताकि ऐसे मामलों का समय रहते खुलासा किया जा सके।
इस विवाद के सामने आने के बाद जिला निर्वाचन कार्यालय ने तकनीकी त्रुटि सुधारते हुए कहा कि केशरवानी का नाम गलती से भिलाई में जुड़ गया था, जिसे अब बिलासपुर में जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही है। किंतु कांग्रेस नेताओं ने इस सफाई को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए सुनियोजित तरीके से मतदाता सूची में फेरबदल करने का आरोप कायम रखा है।
मामला अब राजनीतिक तूफ़ान का रूप ले रहा है, जहाँ एक ओर कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक ढाँचे पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा की ओर से अभी कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन आरोपों और जवाबों के बीच यह मुद्दा चुनावी वातावरण में नई बहस जरूर खड़ी कर गया है।
