रायपुर। भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला और कहा कि लोकतंत्र को बचाने वाले संस्थानों का योजनाबद्ध तरीके से दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के लिए तीनों स्तंभ—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—की स्वतंत्रता बहुत जरूरी है। लेकिन आज ये तीनों ही सत्ता के दबाव में एक ही सुर में बोलते नजर आ रहे हैं। अगर सभी स्तंभ सत्ता के सामने झुक जाएंगे, तो लोकतंत्र का आधार ही खत्म हो जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों के अधिकारी न केवल पक्षपात कर रहे हैं, बल्कि विपक्षी नेताओं को डराने और दबाने के लिए संस्थानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
बघेल ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए न्यायपालिका को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग की और दोषी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की बात कही। साथ ही उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो संस्था निष्पक्ष चुनाव की जिम्मेदारी निभाती है, आज उसी पर सवाल उठ रहे हैं।
उनका कहना था कि अगर चुनाव प्रक्रिया पर ही लोगों का भरोसा डगमगाने लगे, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाएगी। लोकतंत्र किसी एक राजनीतिक दल की जागीर नहीं है, यह जनता की आवाज है और इसे मजबूत रखना सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी संस्थानों से अपील की कि वे सत्ता के आगे न झुकें और लोकतंत्र को बचाने में अपनी भूमिका निभाएं।
