September 5, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

CM का बड़ा ऐलान: डिजिटल अटेंडेंस और स्थानीय भाषा मॉडल से बदलेगा शिक्षा का भविष्य

छत्तीसगढ़ में आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025 में मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में कई अहम कदमों की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय स्तर पर नवाचार ही सबसे प्रभावी उपाय हैं। बैठक में शिक्षकों की भूमिका, छात्रों की उपस्थिति, ड्रॉप-आउट दर और डिजिटल शिक्षा प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में आधार आधारित अटेंडेंस मॉनिटरिंग सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक अच्छा कार्य कर रहे हैं, उन्हें सरकार की ओर से सम्मान और प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं, उपस्थिति में गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी। शाला विकास समितियों को सक्रिय करने और बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए अभिभावकों से संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में ड्रॉप-आउट दर कम करने और Gross Enrolment Ratio (GER) को 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया। इसके लिए प्रत्येक बच्चे का पंजीकरण और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम करने के निर्देश दिए गए।

शिक्षा में स्थानीय भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बीजापुर जिले के स्थानीय भाषा आधारित मॉडल को पूरे राज्य में लागू करने की बात कही। इस मॉडल में 10वीं और 12वीं पास स्थानीय युवाओं की मदद से कक्षा 1 से 5 तक ‘गोंडी’ जैसी स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई करवाई जा रही है। इस नवाचार से बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि और ड्रॉप-आउट में कमी आई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि 31 दिसंबर तक सभी विद्यार्थियों के लिए 12 अंकों का APAR ID बनाया जाए, जो DigiLocker से जुड़ा रहेगा। इससे बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, छात्रवृत्ति और किताबों के वितरण में पारदर्शिता आएगी। इसके साथ ही YouTube और PM ई-विद्या प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को और विस्तारित किया जाएगा।

बैठक में दंतेवाड़ा जिले की सफलता का उदाहरण भी दिया गया, जहां हाल में 10वीं बोर्ड परीक्षा में 9.32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह प्रशासन और शिक्षकों की संयुक्त मेहनत का नतीजा बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए हर जिले को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और राज्य का भविष्य उज्जवल बन सके।

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