बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद साफ दिखाई देने लगे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री का चेहरा अभी तय नहीं किया जाएगा — चुनाव के बाद विधायक दल नेता चुनेगा। इस बयान से एक ओर जहां राजनीतिक हलचल मच गई, वहीं गठबंधन के नेताओं की अलग-अलग राय भी सामने आने लगी।
अमित शाह का बयान
अमित शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री का नाम पार्टी या शीर्ष नेतृत्व पहले से घोषित नहीं करेगा। चुनाव जीतने के बाद गठबंधन के निर्वाचित विधायक दल की बैठक होगी और वहीं से नेता चुना जाएगा। शाह ने इसे लोकतांत्रिक और पारदर्शी प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है लेकिन अंतिम निर्णय विधायक दल का ही होगा।
चिराग पासवान का समर्थन
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शाह के इस बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में किसी एक नेता को पहले से थोपने की बजाय सभी दलों को समान अवसर मिलना चाहिए। जीत के बाद विधायक दल को नेता चुनने का अधिकार देना सही कदम है और इससे सहमति बनाना आसान होगा।
मांझी की नाराजगी
वहीं दूसरी ओर, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शाह के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का नाम चुनाव से पहले तय होना चाहिए ताकि मतदाता को साफ तस्वीर दिखे कि वे किस नेतृत्व को चुन रहे हैं। मांझी का मानना है कि इस तरह की अनिश्चितता से चुनाव में भ्रम की स्थिति बनती है।
राजनीतिक मायने
यह मुद्दा सिर्फ मुख्यमंत्री पद के नाम का नहीं बल्कि गठबंधन राजनीति के समीकरणों का है। पहले से नाम तय करने पर एक दल को बढ़त मिलती है, जबकि चुनाव बाद तय करने से सभी सहयोगी दलों के बीच शक्ति संतुलन बना रहता है। शाह का यह बयान इस बात का संकेत है कि बीजेपी सभी सहयोगियों को साथ लेकर चुनाव बाद स्थिति के अनुसार फैसला
करना चाहती है।
