July 22, 2026
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नई शराब नीति को लेकर उठा राजनीतिक तूफान: जनता की आवाज़ को नज़रअंदाज़ करने का कांग्रेस ने लगाया आरोप

Chhattisgarh में नई शराब नीति को लेकर सियासत गर्मा गई है। राज्य सरकार आगामी वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए नई आबकारी नीति तैयार कर रही है। इसके लिए तीन दिनों तक रायपुर में लगातार बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में शराब से जुड़े कारोबारी, लाइसेंसधारक, विदेशी कंपनियां और क्लब संचालक शामिल हुए। सरकार का कहना है कि इन सुझावों के आधार पर नीति को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा ताकि शराब बिक्री के नियमों में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

वहीं Indian National Congress ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार पर जनता की आवाज़ को अनदेखा करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा कि नीति बनाने में शराब बेचने वालों से तो सलाह ली जा रही है, लेकिन आम जनता से नहीं। पार्टी ने विशेष रूप से उन महिलाओं की आवाज़ उठाई है जो शराबबंदी की मांग को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन कर रही हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जब सरकार सत्ता में आई थी तब शराबबंदी का वादा किया गया था, लेकिन अब शराब बिक्री बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

इस पर Bharatiya Janata Party ने जवाब देते हुए कहा कि विभाग का मकसद केवल इतना है कि क्लबों और बारों में तय नियमों और समय के अनुसार काम हो, ताकि अव्यवस्था न फैले। भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीति निर्माण की प्रक्रिया पारदर्शी है और इसमें किसी का पक्षपात नहीं हो रहा।

नई शराब नीति को लेकर यह विवाद अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलता जा रहा है। जहां एक ओर सरकार व्यवस्था सुधारने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष जनता की आवाज़ को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगा रहा है। अब देखना होगा कि नीति बनाते समय सरकार किन सुझावों को प्राथमिकता देती है—व्यवसायियों के या जनता के।

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