प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)-2.0 के तहत केंद्र सरकार ने प्रदेश को 50 हजार आवासों का कोटा स्वीकृत किया है। लेकिन अब तक पात्र हितग्राहियों की पहचान का काम समय पर पूरा नहीं हो सका है। राज्य के अधिकांश नगरीय निकाय आवेदन एकत्र करने और हितग्राहियों के चयन में सुस्ती बरत रहे हैं। इस कारण योजना की प्रगति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
अभी तक लक्ष्य के मुकाबले केवल 23 प्रतिशत हितग्राही ही चिन्हित किए जा सके हैं। कई जिलों में यह संख्या शून्य है। सबसे चिंताजनक स्थिति दंतेवाड़ा और नारायणपुर की है, जहाँ एक भी पात्र हितग्राही का चयन नहीं हुआ है। दंतेवाड़ा में 565 और नारायणपुर में 184 मकान बनना प्रस्तावित है। इसी तरह मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में 1,278 मकान स्वीकृत हैं, लेकिन अब तक केवल 3 प्रतिशत पात्र हितग्राही ही चिन्हित हो सके हैं।
इसके अलावा बस्तर, बीजापुर, सुकमा, दुर्ग, जशपुर और महासमुंद में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी निकायों को सख्त चेतावनी जारी की है।
सरकार ने 30 नवंबर की डेडलाइन तय की है। इस तिथि तक सभी नगरीय निकायों को 100 प्रतिशत पात्र हितग्राहियों के नाम तय कर प्रस्ताव केंद्र को भेजना होगा। इसके बाद राज्य सरकार डीपीआर बनाकर केंद्र को भेजेगी। अधिकारियों ने कहा है कि यदि तय समय सीमा में काम पूरा नहीं हुआ तो संबंधित निकायों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि कार्य में तेजी आएगी और जल्द ही 50,502 मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा, जिससे हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा।
