छात्रों में तनाव, अवसाद और आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में मनोरोग विशेषज्ञ (Psychiatrists) तैनात किए जाएंगे, ताकि छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श तुरंत मिल सके।
शिक्षा विभाग के मुताबिक, इस योजना का मकसद है कि “समय रहते बच्चे की पीड़ा पहचानी जाए, उससे बात की जाए और उसका समाधान खोजा जाए।”
कई मामलों में यह देखा गया है कि बच्चों की अकेलापन, पारिवारिक दबाव या रिजल्ट का डर उन्हें खतरनाक कदम उठाने की ओर धकेल देता है। ऐसे में स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता ही सबसे प्रभावी रोकथाम बन सकती है।
हर जिले में विशेषज्ञों का एक मेंटल हेल्थ सेल बनाया जाएगा, जो स्कूलों का दौरा करेगा, शिक्षकों को भी बेसिक काउंसलिंग की ट्रेनिंग देगा और गंभीर मामलों को चिकित्सा संस्थानों से जोड़ेगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि अगर “माइंड हेल्थ को एजुकेशन सिस्टम का हिस्सा बनाया जाए,” तो बच्चों में आत्महत्या के मामलों में बड़ी गिरावट आ सकती है।
इस पहल के तहत शिक्षा विभाग ने यह भी प्रस्तावित किया है कि हर स्कूल में “काउंसलिंग कॉर्नर” बनाया जाए — जहां बच्चे खुलकर अपनी बात कह सकें।
