भोपाल के बजरिया थाना क्षेत्र की एक युवती ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए समाज और परिवार के बंधनों से खुद को आज़ाद कर लिया। करीब दस महीने पहले अचानक घर से गायब हुई इस युवती की तलाश उसके परिजनों ने कई महीनों तक की, लेकिन जब वह नहीं मिली तो पिता ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षकरण याचिका दायर कर दी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने युवती की तलाश शुरू की और आखिरकार वह इंदौर में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हुए मिली। जब पुलिस ने उसे कोर्ट के सामने पेश किया, तो उसने बताया कि वह अपने पिता के साथ वापस नहीं जाना चाहती, क्योंकि पिता उसकी पढ़ाई रोककर उसकी शादी करवाना चाहते थे। युवती ने कहा कि उसका सपना IAS बनने का है और वह इसी की तैयारी में जुटी है।
युवती ने अदालत को बताया कि उसके पिता ने 12वीं कक्षा के बाद उसकी पढ़ाई बंद करा दी थी और उस पर शादी का दबाव बनाया गया था। घर का माहौल उसके सपनों के खिलाफ था, इसलिए उसने अपना घर छोड़ दिया। अब वह किराए के एक कमरे में रहकर नौकरी कर रही है और साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रही है।
मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो न्यायालय ने युवती और पिता दोनों की बातें सुनीं। पिता ने भरोसा दिलाया कि वे अब बेटी पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालेंगे। इस पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली बेंच ने युवती से कहा कि वह चार से पांच दिन अपने पिता के साथ रहे और देखे कि सब कुछ ठीक चलता है या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर स्थिति अनुकूल नहीं रहती, तो प्रशासन उसके रहने और पढ़ाई की व्यवस्था करेगा।
युवती ने कोर्ट में स्पष्ट कहा कि वह अपनी पढ़ाई और करियर को लेकर पूरी तरह दृढ़ है और किसी भी दबाव में वापस नहीं जाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को निर्धारित की है।
