छत्तीसगढ़ में शराब विक्रय व वितरण प्रणाली से संबंधित कथित घोटाले की जांच के क्रम में केंद्रीय जांच एजेंसी Enforcement Directorate (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में मुख्य रूप से ज़ोरदार भूमिका निभाई है चैतन्य बघेल — जो कि उस राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र हैं।
जांच के दौरान सामने आया है कि शराब कारोबार से प्राप्त कथित कालाधन को चलन में लाया गया, जिसे संपत्तियों में बदलने का आरोप लगाया गया है। एजेंसी के अनुसार, कुल मिलाकर लगभग ₹2,100 करोड़ तक की रकम इस घोटाले में भूमिगत रही।
इसके बीच, चैतन्य बघेल के खिलाफ कहा गया है कि उन्होंने करीब ₹16.70 करोड़ मूल्य की अपराध-प्राप्त राशि अपने रीयल-एस्टेट प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश की।
इसके अतिरिक्त, उनकी 364 प्लॉट से अधिक की जमीन व सम्पत्तियों को भी निलंबित (attached) किए जाने की प्रक्रिया आरंभ हुई थी, जिनकी कुल कीमत करीब ₹61.20 करोड़ बताई जा रही है।
घोटाले के ब्यौरे के मुताबिक:
यह देर तक चली प्रक्रिया 2019 से 2022 के बीच संचालित थी, जब राज्य की सरकार उसी समय थी।
कथित तौर पर कई सरकारी प्राधिकरणों, ठेकेदारी समितियों व निजी ठिकानों के माध्यम से शराब विक्रय का पैटर्न बदला गया।
एजेंसी ने पाया है कि जब तक सार्वजनिक खजाने को लाभ मिलना था, वह राशि निजी हिस्सों में चली गई।
इस कार्रवाई के साथ राजनीतिक रूप से हलचल मची है। विपक्षी दल ने इसे केंद्र के एजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है, जबकि सरकार पक्ष ने इसे भ्रष्टाचार-रोधी कार्रवाई बताया है।
जांच अभी जारी है। एजेंसी ने पहले ही कई स्थानों पर सर्वेक्षण व छापेमारी की है तथा आगे की सुनवाई के लिए अदालत में दस्तावेज़ पेश किए जा रहे हैं।
