April 18, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

SIR जांच में बड़ा सख्ती अभियान: 2003 की मतदाता सूची में परिवार का नाम नहीं मिला तो होगी कानूनी कार्रवाई—डिप्टी सीएम विजय शर्मा बोले

छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया तेजी से जारी है। राज्यभर में अब तक 99.51% SIR फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं और 77.80% फॉर्म डिजिटलाइज भी हो चुके हैं। इसी बीच डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने मतदाता सूची की शुचिता पर गंभीर चिंता जताते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि गलत जानकारी देने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

2003 के मूल रिकॉर्ड होंगे आधार

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक व्यक्ति का रिकॉर्ड 2003 की मतदाता सूची से मिलान किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति का या उसके परिजनों का नाम 2003 के रिकॉर्ड में नहीं है और वह परिवारिक उपस्थिति भी प्रमाणित नहीं कर पाता, तो उसके मूल निवास की जांच के साथ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

अवैध प्रवेश और फर्जी दस्तावेज पर मामला दर्ज

विजय शर्मा ने कहा कि SIR देश की संसाधन सुरक्षा और नागरिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यदि कोई व्यक्ति—

अवैध रूप से देश में प्रवेश कर मतदाता सूची में नाम जोड़ने की कोशिश करता है,फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करता है,या अपने पारिवारिक संबंध साबित नहीं कर पाता—तो उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम और अवैध प्रवासी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सजा में 1 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

वैध नागरिकों को चिंता की जरूरत नहीं

डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया में वैध नागरिकों को कोई डर या संदेह नहीं होना चाहिए।

उन्होंने लोगों से अपील की—

  • अपने SIR फॉर्म सही तरीके से भरें।
  • बीएलओ से संपर्क करें।
  • चुनाव आयोग के ऑनलाइन विकल्प का उपयोग करें।

शर्मा ने कहा कि शासन-प्रशासन हर वैध नागरिक की सहायता के लिए तैयार है, लेकिन अवैध घुसपैठियों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा।

चुनाव आयोग पहले ही जारी कर चुका है आदेश

राज्य निर्वाचन आयुक्त यशवंत कुमार ने 21 नवंबर को आदेश जारी कर लोगों को चेतावनी दी थी कि—

मृत व्यक्तियों या ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने हेतु फॉर्म जमा न करें जो अब भारतीय नागरिक नहीं रहे।एक से अधिक स्थानों पर गणना प्रपत्र जमा करना कानूनन अपराध है।फॉर्म में झूठी घोषणा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय है।

एडवोकेट का बयान

रायपुर के एडवोकेट विपिन अग्रवाल के अनुसार धारा 31 के अनुसार—1 साल की जेल,या जुर्माना,या दोनों हो सकते हैं। इसीलिए SIR फॉर्म भरते समय किसी भी स्थिति में गलत जानकारी नहीं दी जानी चाहिए।

डिप्टी सीएम फिर बोले—“समझौता नहीं होगा

विजय शर्मा ने मीडिया से कहा कि मतदाता सूची की शुचिता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि: 2003 के रिकॉर्ड में जो नाम नहीं थे, वे अचानक अब कैसे शामिल हो गए?और कहा कि इस  प्रकार के हर संदिग्ध प्रकरण की गहराई से जांच कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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