छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के सबसे खतरनाक PLGA बटालियन नंबर 1 के कमांडर बारसे देवा के जल्द ही सरेंडर करने की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, देवा जंगल से बाहर निकलने के लिए सुकमा क्षेत्र में सुरक्षित कॉरिडोर की मांग कर रहा है। उसके आत्मसमर्पण की स्थिति में नक्सलियों की सबसे घातक टीम का ढांचा पूरी तरह ढह सकता है।
बटालियन नंबर-1: दंतेवाड़ा–बीजापुर–सुकमा में आतंक का सबसे बड़ा नेटवर्क
बटालियन नंबर 1 को नक्सली संगठन की सबसे खतरनाक मिलिट्री यूनिट माना जाता है। यह टीम AK-47, इंसास, SLR, स्नाइपर गन जैसे हथियारों से लैस सैकड़ों नक्सलियों द्वारा संचालित थी।
इस बटालियन का दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में गहरा प्रभाव रहा है। कई बड़े हमले इसी टीम ने किए थे, जिनमें सैकड़ों जवान शहीद हुए थे।
हालांकि हाल के महीनों में लगातार सफल एनकाउंटर और सुरक्षा बलों के दबाव के कारण यह बटालियन अब कमजोर पड़ चुकी है। देवा को भी अपने बचने के लिए सरेंडर ही एकमात्र रास्ता दिख रहा है।
हिड़मा और देवा — एक ही गांव के रहने वाले, साथ मिलकर करते थे कमान
हिड़मा और बारसे देवा दोनों सुकमा जिले के पूर्तम गांव के रहने वाले थे। लगभग दो साल पहले हिड़मा के संगठन में प्रमोशन के बाद उसने देवा को PLGA बटालियन-1 की कमान सौंपी थी।
18 नवंबर को हिड़मा का आंध्र प्रदेश में एनकाउंटर होने के बाद बस्तर में नक्सल ढांचा लगभग बिखर गया। हिड़मा संगठन को जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी था। उसकी मौत के बाद देवा भी लगातार दबाव में है।
गृह मंत्री की गांव यात्रा और मां से मुलाकात ने बढ़ाई सरेंडर की उम्मीद
कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने पूर्तम गांव का दौरा किया था। वहां उन्होंने हिड़मा और देवा की माताओं से मुलाकात की और सरेंडर करने की अपील की थी।
सूत्र बताते हैं कि इसके बाद देवा ने किसी माध्यम से अपना संदेश बाहर भेजा है और छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई है।
नक्सल नेटवर्क की स्थिति: 15 में से 7 एरिया कमेटी बचीं, कई डिवीज़न खत्म
बस्तर IG सुंदरराज पी के अनुसार—
बस्तर में नक्सलियों की 15 एरिया कमेटियों में से अब सिर्फ 7 बची हैं।माड़, केशकाल और दरभा डिवीज़न लगभग समाप्त हो चुके हैं।पश्चिम बस्तर डिवीज़न में कुछ नक्सली सक्रिय हैं, लेकिन संख्या लगातार कम हो रही है।
दंडकारण्य इलाके में अनुमानतः 120–150 सशस्त्र नक्सली ही अब सक्रिय बचे हैं। यदि बारसे देवा सरेंडर कर देता है, तो नक्सलियों का सबसे खतरनाक मिलिट्री विंग लगभग खत्म हो जाएगा, जिससे बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद अंतिम चरण में पहुँच सकता है।
