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June 4, 2026
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‘वोट चोरी’ के आरोपों पर गरमाई सियासत, राहुल गांधी का मोदी–शाह पर हमला, भाजपा ने पोस्टर से किया पलटवार

देश की राजनीति में एक बार फिर “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की ‘वोट छोड़ो, गांधी छोड़ो’ (या ‘वोट चोरी–गांधी छोड़ो’) रैली के दौरान पार्टी नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री का आत्मविश्वास खत्म हो चुका है और अमित शाह के “हाथ कांप रहे हैं”, क्योंकि कथित तौर पर “वोट चोरी पकड़ी जा चुकी है”।

रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल संस्थाओं को कमजोर नहीं किया, बल्कि देश के प्रतीकों और मूल्यों को भी नुकसान पहुंचाया है। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार समाज में विभाजन पैदा कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने न्यायपालिका और मीडिया पर दबाव का आरोप लगाते हुए कहा कि आज स्थिति यह है कि कांग्रेस नेताओं को तरह-तरह के मामलों में फंसाया जा रहा है, जबकि सत्ता के करीब माने जाने वाले लोगों को राहत मिल रही है। उन्होंने इसे “वॉशिंग मशीन राजनीति” करार दिया, जिसमें विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाया जाता है।

इस बीच, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि ‘वोट चोरी’ के खिलाफ देशभर से करीब 55 लाख हस्ताक्षर जुटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सबूतों के साथ यह मुद्दा उठाया है और रैली के बाद राष्ट्रपति से मुलाकात कर हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपने का अनुरोध किया जाएगा।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्टर जारी कर राहुल गांधी पर तंज कसा। भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस नेता हारने पर ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, लेकिन जीत मिलने पर उसी प्रक्रिया को स्वीकार कर लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सबूत चुनाव परिणामों पर सवाल उठाना लोकतंत्र और जनता के भरोसे को कमजोर करता है।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि ‘वोट चोरी’ का मुद्दा आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक तापमान बढ़ा सकता है। एक तरफ कांग्रेस इसे लोकतंत्र और संविधान से जोड़कर बड़ा आंदोलन बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इसे हार की कुंठा और राजनीतिक बयानबाज़ी बता रही है। फिलहाल, यह विवाद सियासी गलियारों से निकलकर सीधे जनता के बीच पहुंच चुका है, जहां आने वाले समय में इसकी गूंज और तेज होने की संभावना है।

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