अंडर-19 एशिया कप 2025 में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत एक बार फिर क्रिकेट से ज्यादा चर्चा का विषय बन गई। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में जहां दोनों टीमों के बीच मैदान पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला, वहीं भारतीय टीम की ‘नो हैंडशेक’ नीति ने भी सुर्खियां बटोरीं। ग्रुप स्टेज मुकाबले के दौरान भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने टॉस के समय और मैच से पहले पाकिस्तानी कप्तान फरहान यूसुफ से हाथ नहीं मिलाया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि टीम इंडिया इस नीति पर पूरी तरह कायम है।
यह मुकाबला ICC अकादमी ग्राउंड में खेला गया, जहां बारिश से प्रभावित 49 ओवर के मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और ओपनर वैभव सूर्यवंशी महज 5 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद एरन जॉर्ज ने जिम्मेदारी संभालते हुए 85 रनों की अहम पारी खेली, लेकिन अन्य बल्लेबाजों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका। नतीजतन, भारतीय U19 टीम 46.1 ओवर में 240 रन पर सिमट गई।
लक्ष्य का पीछा करते हुए खबर लिखे जाने तक पाकिस्तान ने 15 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 37 रन बना लिए थे। मैच पूरी तरह संतुलन में नजर आया और दोनों टीमों के लिए जीत की संभावना बनी हुई थी।
गौरतलब है कि भारतीय खिलाड़ियों की ‘नो हैंडशेक’ नीति की शुरुआत एशिया कप 2025 से ही हुई थी। इससे पहले भी भारत ने पाकिस्तान के साथ तीन मुकाबलों में हाथ मिलाने से परहेज किया था। इतना ही नहीं, टीम इंडिया ने एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से भी इनकार किया था। मोहसिन नकवी पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री भी हैं, जिसके चलते यह फैसला और ज्यादा चर्चा में रहा। बाद में यही रुख ICC महिला ODI वर्ल्ड कप में भी अपनाया गया, जहां कप्तान हरमनप्रीत कौर ने इसी नीति को जारी रखा।
इस मुकाबले से पहले भारतीय टीम का आत्मविश्वास चरम पर था। टूर्नामेंट के पहले मैच में भारत ने UAE को 234 रनों के बड़े अंतर से हराया था। उस मैच में वैभव सूर्यवंशी ने 171 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी, जबकि एरन जॉर्ज और विहान मल्होत्रा ने 69-69 रन बनाकर टीम को 400 के पार पहुंचाया था। भारत ने 6 विकेट पर 433 रन बनाकर मेन्स U19 एशिया कप इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर दर्ज किया था।
अब भारत और पाकिस्तान दोनों टीमें टूर्नामेंट में अपना दूसरा मुकाबला खेल रही हैं। एक ओर मैदान पर रन और विकेट की जंग है, तो दूसरी ओर ‘नो हैंडशेक’ नीति ने इस मुकाबले को सियासी और कूटनीतिक रंग भी दे दिया है। ऐसे में यह मैच केवल क्रिकेट नहीं, बल्कि संदेशों और प्रतीकों की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है।
