छत्तीसगढ़ के जंगलों में अवैध शिकार की घटनाएं एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। हाल ही में सामने आए मामलों में करंट प्रवाहित तार बिछाकर किए गए शिकार के कारण एक बाघ, एक तेंदुआ और दो बायसन की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटनाएं अलग-अलग जिलों में सामने आईं, लेकिन तरीका एक ही था—छोटे जानवरों को फंसाने के लिए बिछाया गया बिजली का तार, जिसकी चपेट में दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव भी आ गए।
सूरजपुर जिले के गुरु घासीदास–तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक बाघ मृत अवस्था में मिला। जांच में उसके शरीर पर जलने के निशान पाए गए और नाखून-दांत गायब मिले, जिससे करंट लगने से मौत की पुष्टि हुई। इसी तरह कबीरधाम जिले के जंगलों में दो बायसन और एक तेंदुआ भी करंट तार की चपेट में आ गए। तेंदुए का शव एक सप्ताह बाद बरामद हुआ, जिससे उसकी पहचान और मौत के कारणों की पुष्टि हुई।
वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनके घरों से बिजली के तार, भुना हुआ मांस, सूअर के दांत और मोर के पैर जैसे कई आपत्तिजनक सामान बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने छोटे जानवरों के शिकार के लिए करंट प्रवाहित तार बिछाया था, लेकिन उसी में बड़े वन्यजीव फंस गए।
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए PCCF से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है और पूछा है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम क्यों नहीं हो पा रहे हैं।
यह मामला केवल अवैध शिकार का नहीं, बल्कि जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन के लिए बढ़ते खतरे का संकेत है। यदि समय रहते सख्त निगरानी, तकनीकी उपाय और स्थानीय स्तर पर जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और गंभीर रूप ले सकती हैं। वन्यजीवों की रक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि सख्त अमल और सामाजिक जिम्मेदारी से ही संभव है।
