July 22, 2026
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छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में अमानवीय कृत्य: नवजात को जिंदा टॉयलेट में बहाया, पोस्टमॉर्टम ने खोली सच्चाई

छिंदवाड़ा के परासिया सिविल अस्पताल से सामने आया मामला मानवता को झकझोर देने वाला है। यहां अस्पताल के टॉयलेट में एक नवजात बच्ची का शव मिलने के बाद जो खुलासा हुआ, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि बच्ची जन्म के समय जीवित थी और उसकी मौत दम घुटने से हुई। रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची के फेफड़ों और पेट में पानी भरा हुआ पाया गया, जिससे यह साबित होता है कि उसे जानबूझकर टॉयलेट में फ्लश किया गया।

पुलिस जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन ओपीडी में 15 गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आई थीं। इनमें से 14 महिलाओं की पहचान कर ली गई है, जबकि एक महिला अब भी संदिग्ध बनी हुई है। आशंका जताई जा रही है कि उसी महिला ने टॉयलेट में बच्ची को जन्म दिया और सबूत मिटाने के इरादे से उसे कमोड में बहा दिया।

घटना का खुलासा तब हुआ जब सफाईकर्मी ने देखा कि टॉयलेट में फ्लश ठीक से काम नहीं कर रहा है। जांच करने पर कमोड में नवजात का सिर और हाथ फंसा हुआ मिला। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद टॉयलेट सीट को तोड़कर शव को बाहर निकाला गया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची की नाल (गर्भनाल) भी शरीर से जुड़ी हुई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जन्म के तुरंत बाद यह कृत्य किया गया।

अस्पताल परिसर में लगे 26 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। हालांकि जिस टॉयलेट में यह घटना हुई, वहां कैमरा नहीं था। पुलिस एंट्री गेट और गैलरी की फुटेज के आधार पर संदिग्ध महिला और उसके साथ आए लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है।

इस दर्दनाक घटना ने अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी महिला की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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