छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं के कारोबार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 16 दिसंबर को रायपुर और रायगढ़ से पहुंची अधिकारियों की एक टीम ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ क्षेत्र में छापेमारी की थी। इस दौरान सरस्वती मेडिकल स्टोर और संचालक के घर से लगभग 2 लाख 24 हजार रुपये मूल्य की नकली दवाएं बरामद की गईं।
हालांकि, बाद में खाद्य एवं औषधि विभाग को यह जानकारी मिली कि उसी स्थान पर इससे कहीं अधिक मात्रा में नकली दवाएं मौजूद थीं, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इस लापरवाही को लेकर विभाग के कुछ अधिकारियों पर खानापूर्ति और कथित मिलीभगत के आरोप लगे हैं।
जांच के दौरान कारोबारी के बेटे के मोबाइल फोन से अहम सुराग मिले। मोबाइल में नागपुर की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी और गोंदिया से पहले पकड़ी गई नकली दवाओं की तस्वीरें पाई गईं। इन्हीं सबूतों के आधार पर जांच दल घर के अंदर छिपाकर रखी गई दवाओं तक पहुंच सका।
प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि नकली दवाओं की सप्लाई इंदौर और नागपुर जैसे शहरों से जुड़ी हो सकती है। FDA ने जब्त की गई दवाओं में से तीन सैंपल जांच के लिए रायपुर लैब भेजे हैं। वहीं कारोबारी और उससे जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
यह मामला न केवल नकली दवाओं के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की कमजोरियों को भी सामने लाता है।
