छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की कोयला खदान को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन शनिवार को अचानक हिंसक हो गया। खदान के खिलाफ लंबे समय से धरने पर बैठे ग्रामीणों को हटाने पहुंची पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि हालात बेकाबू हो गए। इस दौरान उग्र भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और हिंसक झड़प में महिला थाना प्रभारी को लात मार दी गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं।
घटना के दौरान महिलाओं की बड़ी संख्या भी भीड़ में शामिल थी। हमले में तमनार थाना प्रभारी कमला पुष्पम को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा सहित कई अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए। कुछ घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मियों को रायगढ़ रेफर किया गया।
हिंसा यहीं नहीं रुकी। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों और मौके पर मौजूद एम्बुलेंस को भी आग के हवाले कर दिया। घटनास्थल पर धुएं का गुबार और जली हुई गाड़ियों के दृश्य भयावह हालात को बयां कर रहे थे। हिंसा के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
रविवार को आंदोलन के 17वें दिन भी स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। ग्रामीण अब भी तमनार के सीएचपी चौक स्थित धरना स्थल पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने लिबरा रोड पर पेड़ काटकर रास्ता बंद कर दिया, ताकि प्रशासनिक अमला आगे न बढ़ सके। एहतियात के तौर पर जिंदल फोर्टिस अस्पताल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर रेंज के आईजी संजीव शुक्ला और बिलासपुर कमिश्नर भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और हिंसा में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल रायगढ़ में हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, जबकि ग्रामीणों और पुलिस के बीच टकराव ने एक बार फिर खनन परियोजनाओं को लेकर बढ़ते असंतोष को उजागर कर दिया है।
