छत्तीसगढ़ रेल मंत्री द्वारा आयोजित वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ राज्य में चल रही रेल परियोजनाओं और बजट आवंटन को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई। इस दौरान बिलासपुर जोन मुख्यालय में मौजूद वरिष्ठ रेलवे अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े रहे। कार्यक्रम के दौरान कुछ अधिकारियों के ऊंघते हुए दिखाई देने की बात भी चर्चा का विषय बनी, जिससे बैठक की गंभीरता पर सवाल उठे।
बजट के संदर्भ में बताया गया कि वर्ष 2026–27 के लिए छत्तीसगढ़ को रेलवे विकास हेतु 7,470 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले बजट की तुलना में 545 करोड़ रुपये अधिक है। यह वृद्धि राज्य में रेल नेटवर्क को मजबूत करने, स्टेशनों के पुनर्विकास, नई लाइनों के विस्तार, डबलिंग-ट्रिपलिंग कार्यों और सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इस बजट में किसी भी नए प्रोजेक्ट की घोषणा न होने से स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं।
राज्य में कुल 32 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की योजना पर भी प्रकाश डाला गया, जिन पर लगभग 1,674 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इन स्टेशनों पर आधुनिक यात्री सुविधाएँ, साफ-सफाई, बेहतर प्रवेश-निकास व्यवस्था, प्रतीक्षालय, पार्किंग प्रबंधन और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाओं का विकास किया जाएगा। कुछ प्रमुख स्टेशनों पर कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष स्थानों पर तेजी से काम जारी है।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में रेल विकास से जुड़े लगभग 51 हजार करोड़ रुपये के कार्य प्रगति पर बताए गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद राज्य में मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और कनेक्टिविटी बेहतर होगी। कुल मिलाकर बजट में बढ़ोतरी को सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन नए प्रोजेक्ट्स की अनुपस्थिति ने विकास की गति को लेकर बहस भी छेड़ दी है।
