रायपुर: छत्तीसगढ़ में आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। राज्य की बिजली वितरण कंपनी छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बिजली टैरिफ में औसतन 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है।
पावर कंपनी का दावा है कि पिछले वर्षों के संचित घाटे और मौजूदा वित्तीय दबाव को मिलाकर उस पर करीब 6000 करोड़ रुपये का घाटा है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा दरों पर बिजली आपूर्ति जारी रखना घाटे का सौदा बनता जा रहा है, ऐसे में राजस्व संतुलन के लिए टैरिफ बढ़ाना जरूरी हो गया है।
प्रस्ताव के अनुसार, यदि दरों में यह बढ़ोतरी मंजूर होती है तो घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के बिजली बिल में सीधी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि, अंतिम फैसला नियामक आयोग द्वारा जनसुनवाई और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
बिजली दरों में संभावित वृद्धि को लेकर उपभोक्ता संगठनों में चिंता है, जबकि पावर कंपनी का तर्क है कि बिना टैरिफ संशोधन के बिजली व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखना मुश्किल होगा। अब सबकी निगाहें नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि बिजली महंगी होगी या उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
