बेमेतरा:
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब भुगतान न मिलने से परेशान एक कांग्रेस नेता और ठेकेदार ने आत्मदाह करने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पीड़ित ने अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेल लिया और माचिस से आग लगाने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए समय रहते माचिस छीन ली और बड़ी घटना होने से पहले ही उसे बचा लिया। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पीड़ित की पहचान आरिफ बाठिया के रूप में हुई है, जो पेशे से ठेकेदार हैं और कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे पूर्व में जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव भी रह चुके हैं, हालांकि वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी भंग है। आरिफ बाठिया का आरोप है कि नवागढ़ में कृषि भवन निर्माण का कार्य उन्होंने वर्ष 2023-24 में पूरा कर दिया था, जिसकी कुल लागत करीब 28.40 लाख रुपये है। इसमें से 14 लाख रुपये का अंतिम भुगतान अब तक नहीं किया गया है, जबकि फाइनल बिल भी प्रस्तुत किया जा चुका है।
पीड़ित का कहना है कि भुगतान के लिए वे लगातार कृषि विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD) और संबंधित अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन कहीं से कोई समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा भवन का हैंडओवर लेने और संतुष्टि प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार किया जा रहा है, जिसके चलते लोक निर्माण विभाग अंतिम भुगतान नहीं कर पा रहा है। आरिफ बाठिया ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री दयालदास बघेल के दबाव का हवाला देकर भुगतान रोका जा रहा है।
आरिफ बाठिया ने बताया कि सरकारी भवन का निर्माण उन्होंने बाजार से कर्ज लेकर और उधार पर सामग्री खरीदकर कराया था। अब सामग्री सप्लायर लगातार भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं, जिससे वह मानसिक रूप से अत्यधिक तनाव में आ गए। इसी मानसिक दबाव और निराशा के चलते वे कलेक्ट्रेट पहुंचे और आत्मदाह जैसा कदम उठाने का प्रयास किया।
इस मामले पर लोक निर्माण विभाग के एसडीओ आरके शर्मा ने स्पष्ट किया है कि जब तक कृषि विभाग भवन का विधिवत हैंडओवर लेकर संतुष्टि प्रमाण पत्र जारी नहीं करता, तब तक विभागीय नियमों के अनुसार अंतिम भुगतान संभव नहीं है। वहीं, घटना के बाद ठेकेदार को कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित विभागों से दस्तावेज व जानकारी जुटाई जा रही है।
घटना ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों में भुगतान प्रक्रिया की जटिलता और उससे जुड़े मानवीय पहलू को उजागर कर दिया है, जहां आर्थिक दबाव और प्रशासनिक देरी किसी व्यक्ति को इस हद तक पहुंचा सकती है।
