रायपुर शहर का चिंगरी नाला एक बार फिर सुर्खियों में है। कारण है इसके स्थायी समाधान के लिए भेजा गया करीब 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव, जो बीते कई महीनों से शासन स्तर पर अटका हुआ है। दिसंबर 2024 में इस नाले की समस्या के स्थायी समाधान के लिए डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर राज्य शासन को भेजी गई थी। इसके बावजूद जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 11 मार्च 2025 को नगर निगम आयुक्त द्वारा वही प्रस्ताव दोबारा स्वीकृति के लिए भेजा गया, लेकिन अब तक उस पर भी मंजूरी नहीं मिल सकी है।
चिंगरी नाला लंबे समय से आसपास के रहवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। नाले में गंदगी, कचरा और गंदा पानी जमा रहने से बदबू, मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है। नगर निगम द्वारा समय-समय पर नाले की केवल ऊपरी सफाई कराई जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। इसी वजह से स्थानीय लोग इसे “खानापूर्ति वाली सफाई” कहने लगे हैं।
इस मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने नगर निगम और शासन दोनों पर सवाल खड़े किए हैं। 13 जनवरी को वे खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने साफ कहा कि नगर निगम स्थायी समाधान की बजाय सिर्फ दिखावटी कार्रवाई कर रहा है। नाले से कचरा तो निकलवाया जा रहा है, लेकिन तकनीकी सुधार, दीवार की ऊंचाई बढ़ाने, डायवर्जन और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने जैसे जरूरी काम नहीं किए जा रहे।
आकाश तिवारी ने बताया कि दिसंबर 2024 में चिंगरी नाले के स्थायी समाधान के लिए डीपीआर बनाकर शासन को भेजी गई थी। महीनों बीत जाने के बाद भी जब उस पर कोई फैसला नहीं हुआ, तो 11 मार्च 2025 को करीब 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दोबारा स्वीकृति के लिए भेजा गया। हैरानी की बात यह है कि अब तक इस प्रस्ताव पर भी कोई मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने सवाल उठाया कि ट्रिपल इंजन सरकार होने के बावजूद यह प्रस्ताव क्यों अटका हुआ है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले कार्यकाल में लगाए गए एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) को देशभर में 4-स्टार रैंकिंग मिली थी, जिसके चलते रायपुर नगर निगम को प्रोत्साहन स्वरूप 8 करोड़ 75 लाख रुपये की राशि मिली थी। इस राशि का उपयोग चिंगरी नाले में स्क्रीनिंग वॉल और अन्य स्थायी कार्यों के लिए किया जा सकता था, लेकिन नगर निगम ने उस मौके को भी गंवा दिया।
कुछ दिन पहले महापौर ने भी चिंगरी नाले का दौरा किया था। उनके दौरे के बाद भी सिर्फ सफाई कराई गई, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि चिंगरी नाले की अनदेखी सीधे तौर पर आम लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
मौके पर मौजूद नगर निगम अधिकारियों के सामने भी यह साफ कहा गया कि जब तक 11 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती, तब तक चिंगरी नाले की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। फिलहाल स्थिति यह है कि नाले की सफाई होती है, कुछ दिनों तक हालात ठीक रहते हैं और फिर वही गंदगी, बदबू और बीमारी का खतरा लौट आता है।
चिंगरी नाला अब केवल एक नाला नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुस्ती और निर्णय में देरी का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय लोग लगातार समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन फाइलों में अटका प्रस्ताव उनकी परेशानियों को और लंबा खींचता नजर आ रहा है।
