छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में धर्मांतरण से जुड़ा एक गंभीर और सुनियोजित मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह गतिविधि किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसकी जड़ें जिले के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों तक फैली हुई हैं।
मामले का केंद्र ग्राम धर्मपुर बताया जा रहा है, जहां एक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से आश्रम और चर्च संचालित किए जाने की शिकायत सामने आई थी। आरोप है कि यहां नाबालिग बच्चों को रखकर कथित रूप से धर्मांतरण की गतिविधियां चलाई जा रही थीं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए।
जांच के दौरान सामने आया कि सुदूर और वनांचल क्षेत्रों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया, जहां बिजली की सुविधा नहीं थी। ऐसे इलाकों में सोलर आधारित डिजिटल प्रोजेक्टर और अन्य हाई-टेक उपकरणों के माध्यम से ग्रामीणों को विशेष प्रकार के वीडियो और डिजिटल कंटेंट दिखाकर प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा था। इन गतिविधियों के लिए अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया, जिनकी कीमत हजारों डॉलर आंकी जा रही है।
पुलिस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इनमें लैपटॉप, टैबलेट, आई-पैड, प्रीमियम मोबाइल फोन, प्रोजेक्शन सामग्री, रजिस्टर और वित्तीय दस्तावेज शामिल हैं। इन दस्तावेजों से यह संकेत मिला है कि इस नेटवर्क को बाहरी स्रोतों से फंडिंग मिल रही थी, जिसकी गहन जांच की जा रही है।
दस्तावेजों के विश्लेषण से यह भी पता चला है कि यह नेटवर्क राज्य के कई अन्य जिलों में भी सक्रिय था। सैकड़ों लोग पुलिस के रडार पर हैं और कई संदिग्धों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट की कार्यप्रणाली, आपसी संपर्क और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है। यदि विदेशी फंडिंग या किसी बड़े संगठित षड्यंत्र की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
