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October 20, 2026
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छत्तीसगढ़

कोविड से मौत पर बीमा कंपनी की मनमानी पड़ी भारी, उपभोक्ता आयोग ने 1 करोड़ भुगतान का सुनाया फैसला

बिलासपुर। कोविड-19 से हुई मौत के बाद बीमा दावा खारिज करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक अहम और नजीर माने जा रहे फैसले में बीमा कंपनी को पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने बीमा राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने और मानसिक पीड़ा व वाद-व्यय के रूप में अतिरिक्त मुआवजा भी देने के निर्देश दिए हैं।

मामला क्या था
प्रकरण के अनुसार, परिवादी ने अपनी पत्नी के नाम पर जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान महिला कोविड-19 से संक्रमित हुईं। इलाज के दौरान उनकी स्थिति बिगड़ती गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद पति द्वारा नियमानुसार बीमा दावा प्रस्तुत किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने दावा अस्वीकार कर दिया।

बीमा कंपनी का तर्क
बीमा कंपनी ने दावा खारिज करते हुए यह तर्क दिया कि बीमाधारक महिला को पहले से गंभीर बीमारी थी, जिसकी जानकारी पॉलिसी लेते समय छिपाई गई। कंपनी का कहना था कि तथ्यों को छुपाने के कारण बीमा दावा देय नहीं है।

आयोग में सुनवाई और निष्कर्ष
मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने बीमा दस्तावेजों, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि पॉलिसी जारी करने से पहले स्वयं बीमा कंपनी द्वारा मेडिकल परीक्षण कराया गया था और उस समय बीमाधारक को पूरी तरह स्वस्थ बताया गया था।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जब बीमा कंपनी अपने स्तर पर मेडिकल जांच कराकर पॉलिसी जारी करती है, तो बाद में बिना ठोस और विश्वसनीय प्रमाण के बीमारी छिपाने का आरोप लगाकर दावा खारिज करना अनुचित है। इसे उपभोक्ता सेवा में गंभीर कमी माना गया।
आदेश और उसका महत्व
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह बीमा राशि 1 करोड़ रुपये के साथ 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करे। साथ ही मानसिक कष्ट और न्यायिक खर्च को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त मुआवजा भी अदा करने का आदेश दिया गया।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि बीमा कंपनियां मनमाने तरीके से दावे खारिज नहीं कर सकतीं। कोविड जैसे असाधारण हालात में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है और बीमा कंपनियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

इस निर्णय से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिला है, बल्कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में अन्य उपभोक्ताओं के लिए भी मार्गदर्शक बनेगा। साथ ही बीमा कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में इसे एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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