छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले (कोल स्कैम) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए प्रमुख आरोपी सौम्या चौरसिया, रानू साहू और सूर्यकांत तिवारी को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। इससे पहले ये सभी आरोपी अंतरिम जमानत पर बाहर थे, लेकिन अब उन्हें स्थायी रूप से कानूनी राहत मिल गई है। यह जमानत मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाला बागची की पीठ द्वारा दी गई।
कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी बरकरार रखी हैं, जिनमें आरोपियों का राज्य से बाहर रहना जैसी शर्तें शामिल हैं, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो सके। अदालत का यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है, जिससे आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।
इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक कोल लेवी घोटाले में 273 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। इस प्रकरण में 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और कुल 35 आरोपियों के खिलाफ 5 चार्जशीट (अभियोजन शिकायतें) विशेष अदालत में दाखिल की जा चुकी हैं।
ईडी का दावा है कि छत्तीसगढ़ में कोयले के परिवहन, परमिट व्यवस्था और ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से करीब 570 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। इस पूरे नेटवर्क में प्रशासनिक अधिकारियों, कारोबारियों और बिचौलियों की संलिप्तता सामने आई है।
यह मामला केवल आर्थिक घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और सरकारी सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई नियमित जमानत भले ही आरोपियों को कानूनी राहत देती हो, लेकिन जांच एजेंसियों ने यह स्पष्ट किया है कि आगे की जांच जारी रहेगी और आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे संभव हैं।
