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October 22, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“नई गाइडलाइन दरों से महंगी हुई जमीन-रजिस्ट्री, रायपुर-कोरबा में प्रॉपर्टी बाजार में बड़ा बदलाव”

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रायपुर और कोरबा जिलों के लिए जमीन और मकान की नई सरकारी गाइडलाइन दरें लागू कर दी गई हैं, जिससे दोनों जिलों के रियल एस्टेट बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ये संशोधित दरें 30 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुकी हैं और अब इसी के आधार पर सभी रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी की गणना की जाएगी। नई दरों के लागू होते ही जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया महंगी हो गई है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों, निवेशकों और बिल्डरों पर पड़ रहा है।

महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों की दरों में कुछ हद तक कमी की गई है, लेकिन प्रमुख शहरी और विकसित क्षेत्रों में जमीन के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। रायपुर में फाफाडीह क्षेत्र को सबसे महंगा इलाका बताया गया है, जबकि वीआईपी रोड, नया रायपुर और अमलीडीह जैसे क्षेत्रों में भी दरों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह कोरबा जिले में ट्रांसपोर्ट नगर, कोसाबाड़ी, निहारिका और कटघोरा जैसे इलाके प्रॉपर्टी हॉटस्पॉट के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जहां जमीन की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है।

नई गाइडलाइन दरों का सीधा प्रभाव स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पर पड़ा है, जिससे रजिस्ट्री कराना पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है। यदि किसी व्यक्ति ने पुरानी दरों पर अपॉइंटमेंट लिया था, लेकिन रजिस्ट्री नई दरों के लागू होने के बाद हो रही है, तो उसे नई दरों के अनुसार ही अतिरिक्त स्टांप शुल्क देना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार के राजस्व में तो बढ़ोतरी होगी, लेकिन मध्यम वर्ग और आम नागरिकों के लिए घर खरीदना और प्लॉट लेना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कुल मिलाकर, रायपुर और कोरबा में लागू हुई नई गाइडलाइन दरें रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होंगी। जहां एक ओर यह कदम सरकारी राजस्व को मजबूत करेगा, वहीं दूसरी ओर आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है। आने वाले समय में इन बदलावों का असर प्रॉपर्टी बाजार की मांग, निवेश और आवासीय परियोजनाओं पर भी साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

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