इंदौर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक से 40 लाख रुपये का लोन लेकर की गई धोखाधड़ी के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच के अनुसार, जिस संपत्ति को गिरवी दिखाकर लोन लिया गया था, वह पहले ही वर्षों पहले बिक चुकी थी। इसके बावजूद उसे बैंक रिकॉर्ड में बंधक संपत्ति दर्शाकर लोन स्वीकृत कर दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि लोन प्रक्रिया के दौरान संपत्ति का भौतिक सत्यापन, वैल्यूएशन और कानूनी जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई। बैंक अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों की गहन जांच किए बिना ही लोन को मंजूरी दी, जिससे पूरे बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोन की किश्तें समय पर जमा नहीं होने पर खाता एनपीए घोषित हुआ, जिसके बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। EOW ने इसे सुनियोजित साजिश मानते हुए बैंक अधिकारियों सहित कुल पांच आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है और आगे और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
