छत्तीसगढ़ हाल ही में छत्तीसगढ़ के लोक शिक्षण संचालनालय ने एक ऐसा आदेश जारी किया था जिसमें राज्य के निजी स्कूलों से पहली से चौथी, छठी–सातवीं और नवमी–ग्यारहवीं तक की वार्षिक परीक्षाओं का अधिकार छीनकर उसे जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को सौंप देने की घोषणा की गई। इस फैसले के मुताबिक, निजी स्कूल अब अपने छात्रों की वार्षिक परीक्षा स्वयं आयोजित नहीं कर पाएंगे, बल्कि उन्हें DEO के मार्गदर्शन और नियंत्रण में परीक्षा आयोजित करानी होगी। यह आदेश शिक्षा विभाग की ओर से 25 मार्च से 10 अप्रैल के बीच परीक्षाएं कराए जाने के लिए जारी किया गया था और इसके तहत जिला स्तर पर संचालन समितियों का गठन भी तय किया गया था।
लेकिन इस कदम के बाद छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन सहित कई प्राइवेट स्कूल संचालकों ने कड़ा विरोध जताया। उनका तर्क था कि परीक्षाओं को स्कूल स्तर पर आयोजित करना उनके अधिकारों में शामिल रहा है और शिक्षा के संवेदनशील विषय में अचानक नियम बदलना अनुचित है। उन्होंने बताया कि निजी स्कूल अपने पाठ्यक्रम के अतिरिक्त विषयों पर भी मूल्यांकन और परीक्षा आयोजित करते हैं, जिनका विभागीय नियंत्रण नहीं हो सकता। प्रबंधन ने आरोप लगाया कि यह आदेश नियमों और आरटीई (बच्चों के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार) से बाहर है, और इससे विद्यार्थियों की तैयारी व पढ़ाई प्रभावित होगी। विरोध के बीच शिक्षा विभाग को मजबूरन आदेश वापस लेने का निर्णय लेना पड़ा, जिससे प्राइवेट स्कूल अब पहले की तरह वार्षिक परीक्षाएं आयोजित कर सकते हैं।
इस फैसले की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि शिक्षा की व्यवस्था में सुधार की कोशिशें तो जारी रहेंगी, लेकिन निजी स्कूलों की स्वायत्तता और परीक्षाओं को लेकर परंपरागत अधिकारों को मानते हुए पिछला आदेश वापस ले लिया गया है, ताकि शिक्षण–शिक्षा प्रभावित न हो और विवाद समाप्त हो सके।
