छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी ने माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस नेता चैतन्य बघेल द्वारा जेल की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है। बघेल ने मीडिया से बातचीत के दौरान दावा किया कि जेल में कैदियों को स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराई जातीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कैदियों को इंजेक्शन लगाए जाते थे और उन्हें टॉयलेट जैसी जगहों के पास रहना पड़ता था, जो मानवाधिकारों के विरुद्ध है। इन बयानों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और विभिन्न दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया।
इन आरोपों पर राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि जेल की परिस्थितियों को लेकर बेवजह राजनीति की जा रही है। उन्होंने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं जेल देखी है और कभी इस प्रकार के आरोप नहीं लगाए। शर्मा ने यह भी कहा कि हर मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करना उचित नहीं है और इससे व्यवस्था की छवि खराब होती है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर विषय को भी राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जहां एक ओर विपक्ष जेल व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर करने की बात कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक स्टंट करार दे रहा है। फिलहाल यह मुद्दा जनचर्चा का विषय बन चुका है और आने वाले समय में इस पर और अधिक राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
