29.1 C
Raipur
October 22, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

पॉक्सो कोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य पर केस दर्ज, संत समाज में तीखी प्रतिक्रिया

प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा मामला अब कानूनी और सामाजिक बहस का बड़ा विषय बन गया है। पॉक्सो कोर्ट द्वारा नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने के आदेश के बाद संत समाज के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आरोप दो नाबालिग बच्चों की शिकायत पर आधारित बताए जा रहे हैं, जिसके बाद पुलिस ने संबंधित थाने में मामला दर्ज कर लिया है।

घटनाक्रम की शुरुआत 18 जनवरी 2026 को माघ मेले के दौरान हुई, जब मौनी अमावस्या स्नान के समय शंकराचार्य और मेला प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति बनी। इसके कुछ दिनों बाद 24 जनवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी दो नाबालिगों के साथ थाने पहुंचे और शंकराचार्य पर गंभीर आरोप लगाए। प्रारंभिक स्तर पर FIR दर्ज न होने के बाद मामला अदालत पहुंचा, जहां से कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद संत समाज में मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कुछ संतों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि देश में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। वहीं दूसरी ओर, कुछ धर्माचार्यों का आरोप है कि इस प्रकरण को सनातन धर्म की छवि खराब करने के उद्देश्य से उछाला जा रहा है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उनका तर्क है कि इतने बड़े धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ आरोपों की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए, ताकि सत्य सामने आ सके।

मामले ने सामाजिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है—एक ओर बच्चों की सुरक्षा और न्याय की मांग है, तो दूसरी ओर धार्मिक प्रतिष्ठा और परंपरा की रक्षा की बात कही जा रही है। फिलहाल जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। आगे की कानूनी कार्यवाही ही तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

Related posts

भारत-माला भूमि अधिग्रहण घोटाला: छत्तीसगढ़ में ED की बड़ी कार्रवाई, रायपुर–महासमुंद समेत 9 ठिकानों पर

admin

सरकार के 5 बड़े फैसले: नौकरी, स्टार्टअप और उम्र सीमा पर बड़ा ऐलान

admin

विरोध के आगे झुका विश्वविद्यालय, 5 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव रद्द

admin

Leave a Comment