छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान सरकार सुशासन, सुरक्षा और विकास के त्रिस्तरीय एजेंडे पर काम कर रही है, जबकि पिछली सरकार पर उन्होंने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती शासनकाल में प्रदेश में कथित तौर पर “कांग्रेस सिंडिकेट” के माध्यम से व्यवस्थित तरीके से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। उन्होंने कोयला, शराब और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की संपत्तियों का दुरुपयोग किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को जेल तक पहुंचाया है और आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि सरकार की नीति भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा के मोर्चे पर निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जहां पहले स्कूलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया जाता था, वहीं अब बस्तर क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। पुनर्वास नीति के तहत बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण को उन्होंने सकारात्मक संकेत बताया।
मुख्यमंत्री साय ने विकास और जनकल्याण योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार सुशासन, सुरक्षा और विकास के त्रिस्तरीय संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। बस्तर पंडुम में 54 हजार कलाकारों का पंजीयन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया गया। साथ ही, होमस्टे योजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
समापन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। उनके भाषण ने सदन में राजनीतिक बहस को तीखा बना दिया, लेकिन साथ ही सरकार की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट कर दिया।
