रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समय शिक्षक फेडरेशन ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर परीक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि हाल ही में आयोजित TET परीक्षा का प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत लंबा और जटिल था, जिसके कारण निर्धारित समय में सभी प्रश्नों को हल करना अभ्यर्थियों के लिए काफी कठिन साबित हुआ।
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने अपने पत्र में बताया कि राज्य में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए समय-समय पर TET परीक्षा आयोजित की जाती है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में कुछ बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत तथा अनारक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं, जो इस बार की परीक्षा के स्तर को देखते हुए काफी अधिक प्रतीत होते हैं।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि वर्ष 2026 की परीक्षा के लिए कट-ऑफ अंकों में राहत दी जाए। फेडरेशन का सुझाव है कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए न्यूनतम पात्रता अंक 33 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के लिए 40 प्रतिशत निर्धारित किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। इसके साथ ही फेडरेशन ने यह भी मांग उठाई है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट दी जाए।
फेडरेशन का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बाद TET को अनिवार्य किया गया था, इसलिए उससे पहले नियुक्त शिक्षकों को इस नियम से मुक्त रखा जाना चाहिए। संगठन ने इस संबंध में भारत सरकार द्वारा जारी राजपत्र का भी हवाला दिया है, जिसमें उक्त तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए छूट का प्रावधान बताया गया है।
फिलहाल फेडरेशन ने राज्य सरकार से इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने और शिक्षकों के हित में आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। यदि इन मुद्दों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में शिक्षक संगठनों द्वारा आंदोलन की संभावना भी जताई जा रही है।
