बस्तर संभाग में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शिक्षक एवं प्राथमिक शाला के प्रधान पाठकों की माध्यमिक शाला में पदोन्नति की प्रक्रिया प्रशासनिक ढिलाई के कारण अधर में लटक गई है। लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे सैकड़ों शिक्षकों को अब और इंतजार करना पड़ेगा, जिससे उनमें निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा कार्यालय जगदलपुर द्वारा 23 फरवरी 2026 को जारी पत्र के माध्यम से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि 1 अप्रैल 2024 की स्थिति में पात्र शिक्षकों एवं प्रधान पाठकों (एलबी/नियमित) ‘टी’ एवं ‘ई’ संवर्ग की जिला-वार सूची तैयार कर तत्काल प्रेषित की जाए। साथ ही 26 फरवरी 2026 को दोपहर 3 बजे तक संबंधित दस्तावेजों सहित कार्यालय में उपस्थित होकर सूची उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे। यह सूची पदोन्नति प्रक्रिया की आधारशिला थी, जिसके बिना आगे की कार्रवाई संभव नहीं थी।
हालांकि निर्धारित समय सीमा के बावजूद बस्तर, बीजापुर, नारायणपुर और कोंडागांव जिलों से सूची समय पर प्राप्त नहीं हो सकी। इस प्रशासनिक चूक के कारण पूरी पदोन्नति प्रक्रिया ठप हो गई। संभागीय कार्यालय ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो विभागीय कार्रवाई की भी संभावना जताई जा रही है।
इस देरी का सीधा असर शिक्षकों के मनोबल पर पड़ रहा है। कई शिक्षक वर्षों से पदोन्नति की पात्रता पूरी कर चुके हैं, लेकिन कागजी औपचारिकताओं और प्रशासनिक सुस्ती के कारण उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। माध्यमिक विद्यालयों में प्रधान पाठकों के पद रिक्त रहने से शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। विद्यालय प्रबंधन, शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन व्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है।
समग्र रूप से यह मामला न केवल प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न उठाता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और दक्षता पर भी गंभीर चिंतन की आवश्यकता दर्शाता है। यदि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई तो इसका खामियाजा छात्रों, शिक्षकों और पूरे शिक्षा तंत्र को भुगतना पड़ सकता है।
