रायपुर, 2 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ता (डीए) का मुद्दा अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुका है। वर्षों से लंबित डीए और उसके एरियर्स के भुगतान की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब तलब करते हुए चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
फेडरेशन का कहना है कि वर्ष 2017 से राज्य के कर्मचारियों को केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित बढ़े हुए डीए का लाभ समान दर पर नहीं मिला है। महंगाई दर में लगातार वृद्धि के कारण कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। डीए का उद्देश्य ही कर्मचारियों को महंगाई से राहत प्रदान करना होता है, लेकिन समय पर भुगतान न होने से यह उद्देश्य अधूरा रह गया है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीए की एरियर राशि अब तक लंबित है, जो कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों का हनन है।
सुनवाई के दौरान कर्मचारी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस विषय पर लंबे समय से प्रशासनिक स्तर पर मांग उठाई जाती रही, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। मजबूरन कर्मचारियों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। फेडरेशन के पदाधिकारियों का मानना है कि यदि न्यायालय से सकारात्मक आदेश मिलता है तो राज्य के लाखों कर्मचारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिए जाने के बाद अब सभी की निगाहें सरकार के जवाब पर टिकी हैं। अगली सुनवाई में अदालत सरकार के पक्ष और कर्मचारियों के दावों पर विचार करते हुए आगे की दिशा तय करेगी। यह मामला न केवल कर्मचारियों के आर्थिक हितों से जुड़ा है, बल्कि राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और कर्मचारियों को उनका लंबित डीए एवं एरियर्स कब तक मिल पाता है।
