छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। विधानसभा में स्कूल शिक्षा विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और स्थानीय संस्कृति से भी जोड़ना है।
मंत्री ने बताया कि राज्य में नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को विकसित किया जाएगा। इसके तहत विधानसभा में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए लगभग 22,400 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इस बजट में 105 करोड़ रुपये स्कूल भवनों के निर्माण और 700 करोड़ रुपये मध्याह्न भोजन योजना के लिए आवंटित किए गए हैं। साथ ही सरकार के कार्यकाल में अब तक 12 हजार शिक्षकों को पदोन्नति दी जा चुकी है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिली है।
पाठ्यक्रम में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। राज्य के स्कूलों में पहली कक्षा से योग शिक्षा शुरू की जाएगी ताकि बच्चों में बचपन से ही स्वास्थ्य और अनुशासन की भावना विकसित हो सके। इसके अलावा कक्षा 3 से संस्कृत और अन्य भाषाओं को पढ़ाई में शामिल किया जाएगा। स्कूल पाठ्यक्रम में वैदिक गणित और धर्म दर्शन जैसे विषयों को भी जोड़ा जाएगा, जिससे छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराया जा सके।
सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। अब छात्रों की उपस्थिति और अवकाश आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किए जाएंगे। इससे स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को विद्यार्थियों की उपस्थिति की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। इसके साथ ही मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) भी ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे छात्रों और अभिभावकों को बार-बार स्कूल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
छात्रों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में एनसीसी, एनएसएस और रेडक्रॉस गतिविधियों को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इससे विद्यार्थियों में अनुशासन, सेवा भावना और नेतृत्व क्षमता का विकास होगा। साथ ही स्कूलों में अंतिम पीरियड को खेल गतिविधियों के लिए निर्धारित किया जाएगा, ताकि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त समय मिल सके।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि राज्य में नई शिक्षा नीति के अनुरूप शैक्षणिक कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से पढ़ाई, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन सभी बदलावों से छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था आधुनिक तकनीक, भारतीय ज्ञान परंपरा और स्थानीय संस्कृति से जुड़ते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगी
