छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से सामने आई यह घटना न केवल एक दर्दनाक हादसा है, बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और लापरवाही की एक गंभीर तस्वीर भी पेश करती है। एक ओर जहां जंगल में महुआ बीनने गए ग्रामीण पर भालू ने अचानक हमला कर दिया, वहीं दूसरी ओर घायल व्यक्ति को समय पर उचित सहायता न मिलना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
घटना में लगभग 45 वर्षीय ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके सिर, चेहरे और हाथों पर गहरी चोटें आईं। खून से लथपथ हालत में उसे परिजन किसी तरह अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसकी स्थिति बेहद नाजुक बनी रही। इस दौरान जो सबसे चिंताजनक बात सामने आई, वह यह थी कि जिम्मेदार विभाग के अधिकारी मदद करने के बजाय औपचारिकताओं और फोटो खिंचवाने में अधिक व्यस्त नजर आए।
अस्पताल में भी स्थिति संतोषजनक नहीं रही। घायल व्यक्ति को उचित सुविधा और तत्काल उपचार देने के बजाय उसे लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। यहां तक कि एंबुलेंस के लिए भी परिवार को करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा, जिससे उसकी हालत और बिगड़ती गई। परिजन बेबस होकर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन व्यवस्था मानो सुस्त पड़ी रही।
इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि केवल कागजी सहायता और दिखावटी कार्यवाही से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। जरूरत है कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाए और पीड़ितों को तत्काल और प्रभावी सहायता प्रदान करे।
