रायपुर के माना स्थित नवोदय विद्यालय में कक्षा 10वीं के चार छात्रों की पिटाई का मामला सामने आया है, जिसने पूरे स्कूल परिसर में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि देर रात छात्रों ने मोबाइल पर आपत्तिजनक वीडियो देखा था। इसी दौरान हॉस्टल वार्डन को कमरे से खिलखिलाहट की आवाजें सुनाई दीं। जब उन्होंने अंदर जाकर देखा तो छात्र मोबाइल का इस्तेमाल करते पाए गए।
वार्डन ने पहले बच्चों को डांटा और बाद में इस घटना की सूचना स्कूल के अन्य शिक्षकों को दी। बताया जाता है कि इसके बाद छात्रों की पिटाई की गई। इस पिटाई में एक छात्र को गंभीर चोटें आईं, जबकि बाकी तीन छात्रों के शरीर पर भी निशान पाए गए।
मामला जब अभिभावकों और जिला प्रशासन तक पहुँचा तो कलेक्टर गौरव सिंह ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। उधर, शिक्षकों का कहना है कि छात्र अनुशासनहीनता कर रहे थे और आपत्तिजनक वीडियो देख रहे थे, इसलिए उन्हें सख्ती दिखानी पड़ी।
यह प्रकरण कई अहम प्रश्न खड़े करता है। एक ओर छात्रों के अनुशासन और मर्यादा का सवाल है, तो दूसरी ओर शिक्षा संस्थानों में बच्चों पर शारीरिक दंड दिए जाने की नैतिकता पर बहस है। क्या बच्चों को सुधारने का तरीका हिंसा हो सकता है या संवाद और समझाइश से ही सही दिशा दी जानी चाहिए?
यह घटना शिक्षा प्रणाली और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को हर हाल में प्राथमिकता दी जानीचाहिए।
