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September 7, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

3,200 करोड़ का शराब घोटाला: ईडी की सख्त कार्रवाई, 30 अधिकारी जांच के घेरे में”

छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचाने वाले बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस कथित घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। ईडी ने इस मामले में प्रदेशभर में पदस्थ 30 आबकारी अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इन सभी अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 50 के तहत समन भेजे गए हैं, लेकिन अब तक कोई भी अधिकारी ईडी के समक्ष पेश नहीं हुआ है।

ईडी की यह कार्रवाई राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एसीबी द्वारा दायर चौथे पूरक आरोपपत्र के आधार पर की गई है। इस आरोपपत्र में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं। शुरुआती जांच में यह घोटाला 2,161 करोड़ रुपये का बताया गया था, लेकिन विस्तृत जांच के बाद इसका आंकड़ा बढ़कर 3,200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। EOW की रिपोर्ट के अनुसार, घोटाले की राशि तीन हिस्सों में विभाजित है — पार्ट A में ₹319.32 करोड़, पार्ट BAT में ₹2,174.67 करोड़ और पार्ट C में ₹70 करोड़ शामिल हैं।

ईडी के सूत्रों का कहना है कि नोटिस भेजे जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समन की अनदेखी की है। यदि आगे भी वे जांच में सहयोग नहीं करते हैं, तो ईडी कोर्ट से उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की सिफारिश कर सकती है। एजेंसी का मानना है कि पूछताछ से बचना अधिकारियों की रणनीति का हिस्सा है।

इन 30 अधिकारियों में 1 अतिरिक्त आयुक्त, 5 उप-आयुक्त, 14 सहायक आयुक्त, 7 जिला आबकारी अधिकारी और 3 सहायक जिला अधिकारी शामिल हैं। आरोप है कि 2019 से 2023 के बीच इन अधिकारियों ने विभिन्न जिलों में पदस्थ रहते हुए अवैध शराब बिक्री, डुप्लिकेट होलोग्राम की आपूर्ति, नकली बिलिंग और टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी जैसे कार्य किए।

ईडी और EOW की संयुक्त कार्रवाई में अब तक कुल 5 आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबी, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, व्यवसायी अनवर ढेबर और विशेष सचिव (आबकारी) अरुणपति त्रिपाठी शामिल हैं।

हाल ही में ईओडब्ल्यू ने पूर्व आबकारी आयुक्त और आईएएस अधिकारी निरंजन दास को गिरफ्तार किया था। उन पर नीतियों में हेराफेरी, सरकारी दुकानों से अवैध बिक्री की अनुमति देने, निविदाओं और स्थानांतरण में अनियमितता, तथा डुप्लिकेट होलोग्राम जारी करने के गंभीर आरोप हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि दास, टुटेजा, त्रिपाठी और ढेबर ने मिलकर एक समानांतर तंत्र बनाया, जिसके जरिए व्यवस्थित रूप से आबकारी विभाग की राजस्व प्रणाली को भ्रष्टाचार का माध्यम बनाया गया।

ईडी और ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, ताजा समन इस घोटाले की गहराई तक पहुंचने की दिशा में “महत्वपूर्ण चरण” है। यह जांच अब उस नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में बढ़ रही है जिसने कथित तौर पर छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में संस्थागत भ्रष्टाचार को जन्म दिया और राज्य को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।

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