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October 21, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने ED से कड़ी पूछताछ

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह स्पष्ट करे कि पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ आखिर कौन-सी जांच अभी तक लंबित है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब ED आरोपियों को जमानत नहीं दिए जाने की बात कह रहा है, तो वह यह भी बताए कि किस तरह की जांच अभी जारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच अधिकारी अपनी पर्सनल एफिडेविट दाखिल करें, जिसमें यह बताया जाए कि लखमा से जुड़ी कौन-सी जांच अधूरी है और उसे पूरा करने में कितना समय लगेगा। कोर्ट ने यह भी जताया कि बिना स्पष्ट स्थिति बताए जांच को लंबा खींचना उचित नहीं है।

जानकारी के अनुसार ED ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद EOW ने भी उन्हें गिरफ्तार किया। लखमा पिछले 10 महीनों से जेल में बंद हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि लखमा का जल्द इलाज कराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने आबकारी अधिकारियों को दी स्थायी सुरक्षा

इसी मामले में कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग के उन अधिकारियों की अंतरिम गिरफ्तारी सुरक्षा को स्थायी कर दिया, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग व भ्रष्टाचार के आरोप हैं। यह आदेश जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने दलीलें सुनने के बाद दिया।

क्यों हुई थी कवासी लखमा की गिरफ्तारी?

ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा शराब सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे। उनके निर्देश पर सिंडिकेट काम करता था तथा नीति बदलाव में भी उनकी भूमिका थी। आरोप है कि उनके इशारे पर FL-10 लाइसेंस जारी किए गए, जिससे सिंडिकेट को फायदा हुआ।

ED का दावा है कि आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी लखमा को थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

कमीशन के पैसों से संपत्ति निर्माण का आरोप

कोर्ट में ED की ओर से बताया गया कि शराब घोटाला तीन साल चला और इस दौरान लखमा को हर महीने लगभग 2 करोड़ रुपये मिलते थे। कुल 36 महीनों में यह राशि करीब 72 करोड़ रुपये तक पहुंची। आरोप यह भी है कि इसी पैसे से उनके बेटे का घर और कांग्रेस भवन का निर्माण करवाया गया।

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