छत्तीसगढ़–मध्य प्रदेश बॉर्डर पर नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में मध्य प्रदेश पुलिस की हॉकफोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा शहीद हो गए। नरसिंहपुर जिले के बोहानी गांव के रहने वाले आशीष की शादी जनवरी में होने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही वह नक्सल विरोधी अभियान के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए।
बालाघाट में पदस्थ DSP संतोष पटेल ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि जिस मां ने कल शाम तक बेटे से शादी की तैयारियों को लेकर बातचीत की होगी, वह आज उसके शहादत की खबर से टूट गई होगी।
29 वर्षीय आशीष शर्मा किसान परिवार से आते थे। पिता देवेंद्र शर्मा किसान हैं और मां शमीला शर्मा गृहिणी हैं। छोटा भाई अंकित पढ़ाई कर रहा है। आशीष 2016 में SI के रूप में SAF में भर्ती हुए थे और 2018 में हॉकफोर्स में प्रमोट होकर पहुंचे। नक्सल प्रभावित इलाकों में काम करते हुए उन्होंने कई सफल ऑपरेशनों को अंजाम दिया।
साल 2022 में बालाघाट के हरोटोला़ जंगल में कुख्यात नक्सली रूपेश उर्फ हंगा के एनकाउंटर के लिए उन्हें गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 2023 में महिला नक्सली सरिता और सुनिता को मार गिराने के अभियान में भी उनकी अहम भूमिका रही। इसी के बाद उन्हें ‘आउट ऑफ टर्न’ प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बनाया गया।
शहीद आशीष शर्मा इन दिनों बालाघाट जिले के किरणापुर थाना क्षेत्र की कीन्ही चौकी में पोस्टेड थे। अभियान के दौरान छत्तीसगढ़ के बोरतलाव से लगे कंघरू गांव के जंगलों में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में आशीष घायल हुए, जिन्हें तत्काल डोंगरगढ़ एयरलिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शहीद इंस्पेक्टर को श्रद्धांजलि देते हुए घोषणा की कि सरकारी नियमों के अनुसार उनके छोटे भाई को सरकारी नौकरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जारी रहेगी और यह घटना सुरक्षा बलों के मनोबल को नहीं तोड़ पाएगी।
