April 17, 2026
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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में शुरू होगी हाई-टेक एयर स्टरलाइजेशन व्यवस्था; CIMS बना अग्रणी मेडिकल सेंटर

बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) प्रदेश का पहला ऐसा मेडिकल कॉलेज बनने जा रहा है, जहां सेमीकंडक्टर आधारित एयर प्यूरिफिकेशन और स्टरलाइजेशन सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इस संबंध में एसईसीएल और CIMS प्रबंधन के बीच गुरुवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू हुआ, जिसके साथ ही अस्पताल में अत्याधुनिक वायु शुद्धिकरण तकनीक लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

समारोह में CIMS की ओर से अधीक्षक डॉ. रमणेश मूर्ति और एसईसीएल की ओर से महाप्रबंधक (CSR) सी. एम. वर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर एसईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) बीरांची दास, CIMS की CMO डॉ. श्रुति देव मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह सहित दोनों संस्थानों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

नया स्टरलाइजेशन सिस्टम परंपरागत फिल्टर या सामान्य एयर प्यूरिफिकेशन यूनिट्स की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी माना जाता है। यह तकनीक अस्पताल की हवा में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया, फंगल स्पोर्स और अन्य सूक्ष्मजीवों को 99% तक निष्क्रिय करने में सक्षम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तकनीक ICU, OT, वार्ड और OPD जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में संक्रमण नियंत्रण के लिए खासतौर पर उपयोगी साबित होगी।

यह प्रणाली ऊर्जा की बचत करती है और लंबी अवधि तक स्थायी रूप से संचालित की जा सकती है। इसके जरिए वायु गुणवत्ता को मेडिकल-ग्रेड स्तर तक शुद्ध किया जा सकेगा, जिससे अस्पताल के अंदर संक्रमण फैलने के जोखिम में भारी कमी आएगी।

एसईसीएल प्रबंधन के अनुसार, CSR योजना के तहत इस सिस्टम की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरण, तकनीकी विशेषज्ञता, इंस्टॉलेशन और रखरखाव हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहयोग CIMS को प्रदेश के अग्रणी हाई-टेक मेडिकल सेंटरों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

CIMS अधीक्षक डॉ. रमणेश मूर्ति ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर आधारित स्टरलाइजेशन तकनीक से प्रदेश में अस्पताल संक्रमण नियंत्रण को नई दिशा मिलेगी और मरीजों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और विश्वस्तरीय उपचार प्रदान करना संभव हो सकेगा।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि अस्पताल की वायु गुणवत्ता सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। नई तकनीक के आने से संक्रमण का खतरा काफी कम होगा और स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी बदलाव का नया अध्याय शुरू होगा।

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