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October 22, 2026
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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: सरेंडर नक्सलियों के खिलाफ दर्ज केस होंगे वापस, 14 कानूनों में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की नक्सल समस्या को कम करने और पुनर्वास प्रक्रिया को मजबूत बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। साय कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में बुधवार को उन नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया गया, जिन्होंने हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए कैबिनेट सब-कमेटी और जिला स्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया है। यह कदम प्रदेश में नक्सल हिंसा को नियंत्रित करने और पुनर्वास नीति को गति देने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

कैबिनेट की बैठक में कानूनों को सरल बनाने के उद्देश्य से जन विश्वास विधेयक-2025 के दूसरे संस्करण को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत 11 विभागों के 14 अधिनियमों में संशोधन किया जाएगा और 116 प्रावधानों को बदलते हुए छोटे उल्लंघनों पर प्रशासनिक जुर्माना और त्वरित निपटान की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद राज्य में ease of doing business और ease of living को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम अनुपूरक अनुमान (Supplementary Budget) को भी कैबिनेट की मंजूरी प्रदान की गई। यह वित्तीय वर्ष के लिए आवश्यक प्रशासनिक और विकासात्मक व्यय का रोडमैप तय करेगा।

इसके साथ ही सरकार ने दलहन-तिलहन खरीद, धान खरीदी गारंटी, पब्लिक एंटरप्राइजेज विभाग का विलय, ईडब्ल्यूएस-एलआईजी मकान बिक्री अनुमति, और नवा रायपुर क्रिकेट स्टेडियम को राज्य क्रिकेट संघ को लीज पर देने पर भी निर्णय लिया।

साय कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण फैसलों में 2025 की तबादला नीति को मंजूरी, ग्राम पंचायतों के नाम बदलने, कला ग्राम की स्थापना, खेल को बढ़ावा देने संबंधी निर्णय, किफायती आवास नियम-2025 को स्वीकृति और बस्तर-सुरगुजा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे नीति जैसे प्रस्ताव शामिल रहे।

कैबिनेट के पुराने निर्णयों की समीक्षा करते हुए यह भी उल्लेख किया गया कि ‘मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान’ को मंजूरी मिली थी, जिसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं को 100 से बढ़ाकर 200 यूनिट तक 50% बिजली छूट मिलेगी। वहीं प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर सब्सिडी दी जाएगी, जिससे घरेलू बिजली खपत को शून्य करने में मदद मिलेगी।

जिला स्तरीय समिति नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच कर अपनी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपेगी। इसके बाद विभागीय अनुशंसा कैबिनेट उप-समिति को भेजी जाएगी, जहाँ जांच के  बाद अंतिम प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

कुल मिलाकर, साय कैबिनेट के इन निर्णयों से प्रदेश में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक सरलता, आर्थिक विकास और नक्सल समस्या के समाधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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